यह रुबाई जीवन के अनवरत दर्द और अकेलेपन को दर्शाती है। कवि कहता है कि जीवन की राहों में एक ऐसा दर्द छिपा है जो आँखों से आँसू बनकर बहता है। यह दर्द हर पल सताता है और दिल में बस गया है। सीने के पहलू में एक गहरा ज़ख्म है, जिसे कवि बेकाबू होकर जी रहा है। न कोई साथी है, न कोई सहारा, बस तन्हाई ही उसकी खोज है।