जीवन की धारा

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: जाती, कहती, बढ़ती  |  Radeef: चली जाती है
जीवन एक धारा है, बहती चली जाती है हर पल नया रूप धर, कुछ कहती चली जाती है कभी शांत, कभी प्रखर, कभी तूफानों से लड़कर अपनी मंज़िल की ओर ये बढ़ती चली जाती है

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: जाती, सिखाती, दिखाती  |  Radeef: जाती है
ज़िंदगी एक राह है, चलती जाती है हर मोड़ पे नया सबक, सिखाती जाती है कभी हँसी की किरण है, कभी आँसू की बरसात ये हर पल नया रंग, दिखाती जाती है