उदासी के लम्हे

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: अंधेरा, सवेरा  |  Radeef: है
मन में एक सूनापन गहरा है आँखों में बस अश्क ठहरा है हर लम्हा अब भारी लगता है जैसे कोई गम का पहरा है

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: शोर, भोर  |  Radeef: है
दिल में जो खामोशी का शोर है समझ नहीं आता ये कैसा दौर है रातें कटती नहीं, नींद आती नहीं बस इंतज़ार किसी भोर है

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: यादें, बाहें  |  Radeef: हैं
पुरानी बातें, वो बीती यादें आज भी सताती हैं, जैसे छाँव के साये खोया खोया सा रहता हूँ मैं जब भी आती हैं तेरी बेवजह राहें