प्रेरणा की लौ

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: चलो, ढलो, मलो, जलो  |  Radeef: उठो
हर राह की मुश्किलों से अब चलो, उठो। नया सवेरा है, तुम भी नए ढलो, उठो। गिरकर संभलना ही तो जीवन की कला है, ख़ुद को ज़माने की भट्टी में मलो, उठो। अंधेरों से डरना नहीं है मर्दानगी, अपने ही भीतर की आग से जलो, उठो। हर पल को जियो ऐसे कि मिसाल बनो, सपनों की उड़ान भरने को चलो, उठो।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: खुदा, दवा, हवा, अदा  |  Radeef: सदा
जब हौसला हो बुलंद तो साथ दे खुदा सदा। हर मर्ज़ की मिल ही जाती है दवा सदा। तूफ़ानों से क्या डरना, ये तो आते-जाते हैं, बदलती रहती है हर पल ये हवा सदा। अपनी मेहनत पे रख यकीन, न हो मायूस कभी, सफलता की मिलती है कोई अदा सदा। पथरीले रास्तों पे चलते हुए थकना नहीं, मंज़िल की पुकार आती है सुना सदा।