Key Highlights
- सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को नागरिकों का एक मौलिक अधिकार बताया।
- NEET परीक्षा के दौरान छात्रों पर पुलिस ज्यादती के मामले की सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।
- अदालत ने कहा कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।
न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध को मौलिक अधिकार माना
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का एक मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने NEET परीक्षा में कथित पुलिस ज्यादतियों से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। यह मामला अब 28 जुलाई को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना, अपनी असहमति जताना संवैधानिक रूप से संरक्षित है। यह केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान भी है। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की, खासकर जब प्रदर्शनकारी छात्र हों।
NEET पुलिस ज्यादती: छात्रों पर हुई कार्रवाई पर सवाल
यह मामला NEET (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहाँ छात्रों ने कथित तौर पर पुलिस ज्यादतियों का सामना किया। छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिससे कई घायल हुए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से पुलिस कर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि पुलिस की कार्रवाई ने न केवल उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को समझा है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन: क्या कहता है कानून?
भारत का संविधान अपने नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी शामिल है। यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) के तहत संरक्षित है। हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है और इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जैसे कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या देश की सुरक्षा को खतरा होने पर।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विरोध करने का अधिकार कानून और व्यवस्था के भीतर होना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुलिस मनमाने ढंग से बल का प्रयोग कर सकती है या प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का हनन कर सकती है। पुलिस को भीड़ नियंत्रण और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार में संयम बरतना होगा।
आगे क्या: 28 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, जब सुप्रीम कोर्ट इस पर विस्तृत विचार करेगा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई न केवल NEET प्रदर्शनकारियों के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के भविष्य और पुलिस जवाबदेही के संदर्भ में भी इसके व्यापक निहितार्थ होंगे।
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