ज़िंदगी का सफ़र

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: चलता, बदलता, बढ़ता  |  Radeef: ही रहे
ज़िंदगी एक सफ़र है, चलता ही रहे कभी धूप कभी छाँव, बदलता ही रहे हर मंज़िल एक नया इम्तिहान लाए यह कारवाँ है जारी, बढ़ता ही रहे

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: कहानी, पानी, आता, ठहरता  |  Radeef: नहीं
यह ज़िंदगी है यारों, हर पल एक कहानी कभी हँसी है इसमें, कभी आँखों में पानी जो गुज़रा वो लम्हा, वापस आता नहीं यह वक़्त का दरिया है, ठहरता नहीं

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: जलाओ, बढ़ते, पहुँचते  |  Radeef: जाओ
जब छा जाए अँधेरा, उम्मीदों का दिया जलाओ तूफ़ानों से न डरो, बस आगे बढ़ते जाओ हर रात के बाद सवेरा, यह कुदरत का नियम है कभी हार न मानो, मंज़िल तक पहुँचते जाओ