जीवन एक सफ़र
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: मंज़िल, मुश्किल, हासिल, साहिल
Radeef: है
जीवन एक सफ़र है, हर कदम एक मंज़िल है
कहीं धूप कहीं छाँव, कहीं राह मुश्किल है
कभी खुशी कभी ग़म, यही इसकी फ़ितरत है
जो इसे समझ जाए, वही तो कामिल है
हर पल एक सीख है, हर ठोकर एक सबक है
गिरकर उठना ही तो, इस सफ़र का हासिल है
न डरना तू तूफ़ानों से, न घबराना लहरों से
तेरा अपना साहिल, तेरी अपनी मंज़िल है
कहीं धूप कहीं छाँव, कहीं राह मुश्किल है
कभी खुशी कभी ग़म, यही इसकी फ़ितरत है
जो इसे समझ जाए, वही तो कामिल है
हर पल एक सीख है, हर ठोकर एक सबक है
गिरकर उठना ही तो, इस सफ़र का हासिल है
न डरना तू तूफ़ानों से, न घबराना लहरों से
तेरा अपना साहिल, तेरी अपनी मंज़िल है
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: बदलती, चुभती, मिलती, गुज़रती
Radeef: है
ये ज़िंदगी की हक़ीक़त है, पल पल बदलती है
कभी फूल सी महकती, कभी शूल सी चुभती है
जो आज है तेरा अपना, वो कल शायद न हो
हर साँस एक कहानी, हर पल एक नई सुबह है
न रुकती, न ठहरती, ये बस आगे बढ़ती है
हर मोड़ पर नए रंग, हर दिन नई सीरत है
इसे जी ले तू हर पल, ये फिर न कभी मिलती है
बस यादों के पन्नों में, धीरे से गुज़रती है
कभी फूल सी महकती, कभी शूल सी चुभती है
जो आज है तेरा अपना, वो कल शायद न हो
हर साँस एक कहानी, हर पल एक नई सुबह है
न रुकती, न ठहरती, ये बस आगे बढ़ती है
हर मोड़ पर नए रंग, हर दिन नई सीरत है
इसे जी ले तू हर पल, ये फिर न कभी मिलती है
बस यादों के पन्नों में, धीरे से गुज़रती है