प्रेम की परिभाषा: रूहानी एहसास की कव्वाली

फरकान एस खान द्वारा प्रेम की गहराई और उसके रूहानी एहसास पर एक खूबसूरत क़िता। जानें कैसे प्यार बिना कहे भी दिलों को जोड़ता है और जीवन को संवारता है।

Saturday, September 12, 2026
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प्रेम की परिभाषा: रूहानी एहसास की कव्वाली
“प्रेम की परिभाषा: रूहानी एहसास की कव्वाली”
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Date
12 September 2026
Qita — By Furkan S Khan
प्यार वो एहसास है जो रूह को छू जाए बिन कहे ही हर बात दिल तक पहुँच जाए ये वो रिश्ता है जो हर बंधन से परे बस एक नज़र में ज़िंदगी संवर जाए
Qita — By Furkan S Khan
इश्क़ की आग में जलकर ही निखरते हैं दर्द के हर लम्हे में हम सँवरते हैं ये वो दरिया है जहाँ डूब कर मिलते हैं हर साँस में हम तुमको ही पुकारते हैं

रूह: आत्मा, एहसास: अनुभव, परे: ऊपर, संवर जाए: सुधर जाए/सुंदर हो जाए। यह कविता प्रेम के गहरे अनुभव को दर्शाती है जो बिना शब्दों के भी दिलों को जोड़ता है और जीवन को सुंदर बनाता है।

निखरते: और बेहतर होते, सँवरते: सुधरते/सुंदर होते, दरिया: नदी, पुकारते: याद करते/बुलाते। यह कविता प्रेम के उस स्वरूप को व्यक्त करती है जहाँ दर्द भी सुंदरता का कारण बनता है और प्रेमी हर पल अपने महबूब को याद करता है।

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Zainab
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