आत्म-प्रेम: स्वयं से करें पहला प्यार | Furkan S Khan
Furkan S Khan द्वारा रचित आत्म-प्रेम पर आधारित एक मार्मिक दोहा। जानें कैसे स्वयं से प्रेम करके जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है।
यह दोहा आत्म-प्रेम के महत्व को दर्शाता है। स्वयं से प्रेम करना ही सच्चा सुख है, जो मन के सभी दुखों को दूर कर देता है। अपने भीतर के प्रकाश को पहचानना और हर पल स्वयं का सम्मान करना जीवन को सुंदर बनाता है। जो व्यक्ति अपनी कीमत समझता है, वही सबसे मूल्यवान होता है। शब्दार्थ: जोग - योग, साधना, प्रेम रोग - बीमारी, दुख व्यर्थ - बेकार कदर - महत्व, सम्मान राचिये - रम जाइये, लीन हो जाइये आस - आशा, उम्मीद
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