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हम और ज़िंदगी
जीवन का सफ़र: फ़ुरकान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित 'जीवन का सफ़र' ग़ज़ल में ज़िंदगी के हर पहलू, उसके उतार-चढ़ाव और नश्वरता का मार्मिक वर्णन किया गया है। पढ़ें और महसूस करें जीवन के गहरे रहस्य।
Monday, August 31, 2026
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“जीवन का सफ़र: फ़ुरकान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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Date
31 August 2026
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Ghazal — By Furkan S Khan
ये ज़िंदगी का सफ़र है, एक बहता कारवाँ, चलता रहा।
हर मोड़ पे बदली राहें, हर पल नया दरमियाँ, चलता रहा।
क्या खोया क्या पाया हमने, ये कोई जाने कहाँ?
बस एक रीत पुरानी है, हर साँस का निशाँ, चलता रहा।
कभी धूप कभी छाँव मिली, कभी बूढ़ा कभी जवाँ।
ये खेल निराला कुदरत का, जिसका ना कोई बयाँ, चलता रहा।
जो आया वो जाएगा इक दिन, ये दुनिया है फ़नाँ।
मगर यादें हमेशा रहतीं, ये सिलसिला चलता रहा।
Kaafiya: कारवाँ, दरमियाँ, कहाँ, निशाँ, जवाँ, बयाँ, फ़नाँ
Radeef: चलता रहा
Ghazal — By Furkan S Khan
ज़िंदगी एक फ़साना है, कभी हँसी कभी आँसू का नज़ारा है।
जो बीत गया वो लौट के ना आया, बस यादों का सहारा है।
हर शाम के बाद सुबह है, हर रात का एक किनारा है।
ये दुनिया है रीत पुरानी, जिसे जीना सबको गँवारा है।
कभी धूप में चलते रहे, कभी छाँव में हम आवारा।
हर कदम पे एक नई सीख मिली, हर पल एक नया सितारा है।
ये वक़्त है रेत सा फिसलता, ना आएगा ये फिर दोबारा।
बस पल भर की मोहलत है, हर साँस एक अनमोल इशारा है।
Kaafiya: नज़ारा, सहारा, किनारा, गँवारा, आवारा, सितारा, दोबारा, इशारा
Radeef: है
कारवाँ: काफिला, समूह दरमियाँ: बीच में निशाँ: निशान, पहचान जवाँ: जवान, युवा बयाँ: वर्णन, कथन फ़नाँ: नश्वर, मिट जाने वाला
फ़साना: कहानी, किस्सा नज़ारा: दृश्य सहारा: आश्रय, मदद किनारा: छोर गँवारा: स्वीकार्य, पसंद आवारा: बेसहारा, इधर-उधर भटकने वाला सितारा: तारा, भाग्य मोहल्त: अवसर, समय इशारा: संकेत
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