एक ऐसे समय में जब गाजा में मानवीय संकट गहरा रहा है, संयुक्त राष्ट्र में भारत के एक महत्वपूर्ण मतदान ने देश की विदेश नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजा में नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय दायित्वों को बनाए रखने से जुड़े प्रस्ताव पर भारत ने हाल ही में अबस्टेन कर दिया, जिससे विपक्ष और कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में निराशा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस कदम को 'शर्मनाक और निराशाजनक' बताते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की है।
क्या है पूरा मामला?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में गाजा पट्टी में नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय दायित्वों को बनाए रखने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव में गाजा में तत्काल युद्धविराम की मांग की गई थी। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर 149 देशों ने समर्थन में मतदान किया, जबकि 12 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया। भारत उन 19 देशों में से एक था जिसने इस प्रस्ताव पर 'अबस्टेन' (मतदान से दूर रहने) करने का फैसला किया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय स्थिति गंभीर बनी हुई है।
भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने इस फैसले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह संघर्षों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने के भारत के विश्वास के अनुरूप है, और इसका उद्देश्य दोनों पक्षों को करीब लाना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पहले भी इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर कुछ प्रस्तावों पर अबस्टेन किया है, हालांकि दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में भारत ने गाजा युद्धविराम के समर्थन में मतदान किया था।
स्रोत: भारत, 18 अन्य गाजा युद्धविराम पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर अबस्टेन करते हैं - टाइम्स ऑफ इंडिया, भारत यूएनजीए प्रस्ताव पर अबस्टेन करता है इज़रायल की आलोचना करते हुए - इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग
गाजा में मानवीय संकट और हताहतों की संख्या
गाजा में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है, जहां लाखों लोग मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इजरायल कि लगातार गाजा पर बमबारी में अब तक 55,000 से 61,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। यूएनICEF की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 से 50,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं। क्षेत्र में एक पूरी आबादी को घेराबंदी और भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है।
स्रोत: गाजा में 55,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए - एसोसिएटेड प्रेस, इजरायल-गाजा युद्ध में मौतें: लाइव ट्रैकर - अल जज़ीरा, 'अकल्पनीय भयावहता': गाजा पट्टी में 50,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए - यूनिसेफ
आगे की राह
संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस 'अबस्टेन' के फैसले ने देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी विदेश नीति पर बहस छेड़ दी है। यह देखना होगा कि यह निर्णय वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति और मानवीय संकटों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करता है। सरकार को अपने इस राजनयिक कदम के पीछे के दीर्घकालिक विचारों पर अधिक स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता हो सकती है।
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध नवीनतम जानकारी (जून 2025 तक) पर आधारित है। भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा से संबंधित एक प्रस्ताव पर 'अबस्टेन' किया है, और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हालांकि, ईरान पर इजरायली हमलों के बारे में भारत के 'जयकार' करने का दावा प्रियंका गांधी द्वारा व्यक्त किया गया एक आरोप है और यह भारत सरकार की आधिकारिक नीति के अनुरूप नहीं है, जो क्षेत्र में शांति और डी-एस्केलेशन का आह्वान करती है।
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