Live Updates: मध्य पूर्व में ईरान का जवाबी हमला - अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें, अरब देशों में हाई अलर्ट
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद, ईरान ने मध्य पूर्व में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है, जिससे बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित कई अरब देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
ईरान के स्टेट मीडिया प्रेस टीवी ने बड़ी खबर दी है कि इस्लामिक रिवॉल्यूशन के लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में शहीद हो गए।
तेहरान पर हुए इन हमलों में उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी मौत की पुष्टि हुई है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत की पुष्टि की और इसे "इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक" का अंत बताया।
इज़राइल और अमेरिका ने बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।ईरानी स्टेट टीवी ने शहीद होने की घोषणा की और 40 दिनों का शोक मनाने का ऐलान किया है। यह घटना मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती है, क्योंकि अब सत्ता में उत्तराधिकार का सवाल उठ रहा है। दुनिया भर में इस खबर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं – कुछ जश्न मना रहे हैं, तो कुछ इसे बड़े युद्ध की शुरुआत मान रहे हैं।
आज 28 फरवरी 2026 को अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इसका नाम Operation Epic Fury रखा गया है। क्या हुआ?
तेहरान समेत ईरान के कई शहरों (इस्फहान, क़ुम, करज आदि) में विस्फोट हुए। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की मिलिट्री, न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल फैसिलिटीज़ और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने खुद वीडियो में कहा कि ये "major combat operations" हैं, ईरान की नेवी को तबाह करेंगे, न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करेंगे और ईरान के लोगों से कहा "अपनी सरकार पर कब्ज़ा कर लो" (regime change की खुली कॉल)।
ईरान की तरफ से जवाब
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से इज़राइल और खाड़ी में अमेरिकी बेस पर हमले किए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हमला हुआ, जिसमें 50+ बच्चे मारे गए। ईरान इसे "अत्याचार" बता रहा है।
जापान कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन काज़ुओ शी ने X पर स्टेटमेंट जारी किया:
उन्होंने इसे UN Charter और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताया, ट्रंप की regime change वाली बात की कड़ी निंदा की और तुरंत हमले रोकने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा जारी रहा तो मिडिल ईस्ट और दुनिया की शांति को गहरा झटका लगेगा।
ये हमला जून 2025 के बाद का सबसे बड़ा एस्केलेशन है, जब पहले भी न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए थे। दुनिया भर में तनाव बहुत बढ़ गया है – UN सिक्योरिटी काउंसिल की इमरजेंसी मीटिंग हो रही है।
ईरान ने अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में गल्फ देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
सऊदी अरब ने पुष्टि की कि ईरान ने रियाद और पूर्वी प्रांत पर हमला किया, लेकिन सभी मिसाइलें रोक ली गईं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इसे "बेशर्म और कायरतापूर्ण आक्रमण" बताया, कहा कि यह बिना उकसावे का था—खासकर जब सऊदी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उसकी जमीन/हवाई क्षेत्र ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होगा।
सऊदी ने जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा है और पड़ोसी देशों (UAE, बहरीन, कतर, कुवैत, जॉर्डन) पर ईरानी हमलों की भी कड़ी निंदा की। क्षेत्र में तनाव बहुत बढ़ गया है, कई देशों ने हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। कोई बड़ा नुकसान या हताहत की खबर अभी नहीं। (यह घटना आज की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ है।)
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सरदार जब्बारी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान ने हालिया हमलों में केवल अपने पुराने मिसाइल भंडार का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने अपने बयान में कहा:
“ट्रंप को यह समझ लेना चाहिए कि आज हमने सिर्फ पुराने स्टॉक की मिसाइलें दागी हैं, जल्द ही हम ऐसे हथियार दुनिया के सामने लाएंगे जिन्हें आपने पहले कभी नहीं देखा होगा।”
इस बयान को मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह संदेश अमेरिका और उसके सहयोगियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
हालिया घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और कई देशों ने अपनी रक्षा प्रणालियों को हाई अलर्ट पर रखा है।
कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने देश के अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाकर दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने के बाद उनका मलबा एयर बेस के आसपास के क्षेत्रों में गिरा, जिससे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई। हालांकि किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है।
अली अल सलेम एयर बेस कुवैत में स्थित एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है, जहां अमेरिकी और सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियां संचालित होती हैं। माना जा रहा है कि यह हमला क्षेत्र में चल रहे सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी ठिकानों को लक्ष्य बनाकर किया गया।
घटना के बाद कुवैत की सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से शांत रहने और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लेने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया घटनाएं मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव को दर्शाती हैं, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है।
कतर की राजधानी दोहा के बाहरी रिहायशी क्षेत्र में उस समय जोरदार विस्फोट हुआ जब ईरान द्वारा दागी गई मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में नष्ट कर दिया और उसका मलबा जमीन पर आ गिरा।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला कतर में स्थित अल-उदीद एयर बेस को निशाना बनाकर किया गया था, जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह सैन्य अड्डा मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक माना जाता है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों की दूसरी लहर को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार इस हमले में किसी भी प्रकार का नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश की एयर डिफेंस प्रणाली पूरी तरह सतर्क और उच्च स्तर की तैयारी में है तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करने वाले किसी भी खतरे से सख्ती से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नागरिकों, निवासियों और देश में मौजूद सभी आगंतुकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मंत्रालय के अनुसार इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों के मलबे अबू धाबी के विभिन्न क्षेत्रों में गिरे, जिनमें सादियात द्वीप, खलीफा सिटी, बनी यास क्षेत्र, मोहम्मद बिन जायद सिटी और अल फलाह क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि इन स्थानों पर किसी के घायल होने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
यूएई रक्षा मंत्रालय ने इस हमले को देश की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है और कहा है कि राष्ट्र अपनी भूमि और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का पूर्ण अधिकार रखता है।
साथ ही मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें और अफवाहों या अप्रमाणित खबरों को साझा करने से बचें।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद, ईरान ने मध्य पूर्व में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है, जिससे बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित कई अरब देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: ईरान का अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में, ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। यह हमला 28 फरवरी, 2026 को हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'बड़े सैन्य अभियान' की घोषणा की थी, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है।
किन देशों में हुए मिसाइल हमले?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें दागीं। इन देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
बहरीन और कतर की स्थिति
बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट (Fifth Fleet) बेस के मुख्यालय को मिसाइल से निशाना बनाया गया, जिसके आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं और धुएं के गुबार उठते देखे गए। वहीं, कतर के अल-उदीद एयर बेस, जो अमेरिका का मध्य पूर्व में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है, को भी निशाना बनाया गया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोहा के आसमान में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया, जो अल उदीद एयर बेस की ओर बढ़ रही थी। जून 2025 में भी अल-उदीद एयर बेस पर हमले की रिपोर्टें थीं, जिससे एक संचार डोम को नुकसान पहुँचा था।
कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अलर्ट
कुवैत में मिसाइल खतरे के बाद एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। यहां कैंप आरिफजान और अली अल सलेम वायु सेना अड्डा जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित अल धाफरा एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने उच्च दक्षता के साथ इंटरसेप्ट किया। हालांकि, अबू धाबी के एक रिहायशी इलाके में मिसाइल के मलबे के गिरने से संपत्ति को नुकसान पहुंचा और एक एशियाई मूल के व्यक्ति की मौत हो गई।
सऊदी अरब और जॉर्डन की स्थिति
सऊदी अरब पर किसी बड़े सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। रियाद के पास प्रिंस सुल्तान वायु सेना अड्डे पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया था। जॉर्डन में भी एयर सायरन बजाए गए और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। जॉर्डन की सेना ने देश को निशाना बनाकर दागी गई दो मिसाइलों को मार गिराने की सूचना दी है।
ईरान ने हमला क्यों किया?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला सीधे अरब देशों पर नहीं बल्कि उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाकर किया गया। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा उसके सैन्य एवं रणनीतिक ठिकानों, जिसमें परमाणु सुविधाएं भी शामिल थीं, पर किए गए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। ईरान के पास मध्य पूर्व में बैलिस्टिक मिसाइलों का सबसे बड़ा और सबसे विविध भंडार है, जिसकी मारक क्षमता 2000 किमी तक है और यह इज़राइल तक पहुँचने में सक्षम है।
पूरे मध्य पूर्व में बढ़ा खतरा
स्थिति को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और तेल बाजार में भी अस्थिरता देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया के कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'हथियार डालने या मौत का सामना करने' की धमकी दी है। इज़राइल ने अपने सैन्य अभियान को 'रोरिंग लॉयन' नाम दिया है।
मौजूदा हालात ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को दर्शाते हैं, जिसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 6
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