चेन्नई: कभी पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले थलापति विजय, अब तमिलनाडु की राजनीति में एक नई पारी खेलने को तैयार हैं। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि 32 साल की एक लंबी और सोची-समझी तैयारी का नतीजा है। 1992 में 'नालैया थेरपू' से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले विजय ने तब से ही कहीं न कहीं समाज और राजनीति की नब्ज को समझने की कोशिश की है।
उनकी राजनीतिक मंशाओं के संकेत वर्षों से मिलते रहे हैं। फिल्मों में उनके किरदार, खासकर वो जो सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, हमेशा चर्चा में रहे। विजय ने हमेशा अपने प्रशंसकों को एक बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया है। उनके प्रशंसक, जो उन्हें 'थलापति' के नाम से जानते हैं, दशकों से उन्हें राजनीति में सक्रिय देखने की इच्छा रखते थे।
जनता से जुड़ाव: फिल्मों से लेकर जमीनी हकीकत तक
विजय की ताकत सिर्फ उनकी फिल्में नहीं, बल्कि उनका अपने प्रशंसकों से गहरा जुड़ाव है। वे सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक बड़े वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हर फिल्म रिलीज़ के साथ, उनके प्रशंसकों की संख्या और उनका प्रभाव बढ़ता गया। इस दौरान, उन्होंने कई बार सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखी, हालांकि सीधे तौर पर राजनीतिक दलों का समर्थन करने से वे कतराते रहे। यह चुप्पी, आज एक बड़े कदम की ओर इशारा कर रही थी।
उनकी हाल की फिल्में, जैसे 'सरकार' और 'मर्सल', तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी करती नज़र आईं। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तो कमाल किया ही, साथ ही एक बड़े वर्ग को सोचने पर मजबूर भी किया। यह सब एक सोची-समझी पटकथा का हिस्सा रहा होगा, जहाँ उन्होंने धीरे-धीरे राजनीतिक जमीन तैयार की।
💡 क्या आप जानते हैं? थलापति विजय के फैंस क्लब, जिन्हें 'विजय मक्कल इयक्कम' के नाम से जाना जाता है, दशकों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं।
'तमिलगा वेत्री कझगम': एक नए युग का आगाज़
विजय ने जिस 'तमिलगा वेत्री कझगम' (Tamilaga Vettri Kazhagam) पार्टी के गठन की घोषणा की है, वह उनके लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक सपनों का साकार रूप है। पार्टी का नाम ही अपने आप में एक संदेश देता है - तमिलनाडु की जीत। यह दर्शाता है कि विजय का लक्ष्य राज्य के विकास और जनता की भलाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों में ही ताल ठोकेगी, और 2024 के लोकसभा चुनावों में वे सक्रिय रूप से भाग नहीं लेंगे। यह रणनीति, उनके राजनीतिक अनुभवहीनता की कमी को पूरा करने और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की ओर एक कदम माना जा रहा है।
उनकी राजनीतिक यात्रा अब शुरू हुई है, लेकिन इसकी जड़ें 32 साल पुरानी हैं। देखना यह होगा कि थलापति विजय, फिल्मों के 'थलापति' से तमिलनाडु की राजनीति के 'थलापति' बनने में कितने सफल होते हैं।
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