ईरान-इजरायल युद्ध: तनाव, हमले और विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाएं | 16 जून 2025
ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर: इजरायल के हमले, ईरान की प्रतिक्रिया, और विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण। नवीनतम अपडेट्स और विदेश मंत्रालयों के बयान
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सुप्रीम लीडर खामनेई ने इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की बात की है, लेकिन इसमें पाकिस्तान का उल्लेख नहीं है। इसके अतिरिक्त, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र और IAEA से इजरायल के हमलों की निंदा करने की मांग की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अभी कूटनीतिक रास्ते अपनाने की कोशिश कर रहा है।
"इजरायल ने हमारी संप्रभुता का उल्लंघन किया है। यह युद्ध की घोषणा है। हम इसका जवाब देंगे।" - ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची
3. विश्व नेताओं और देशों की प्रतिक्रियाएं
इजरायल-ईरान युद्ध ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। कई देशों और उनके नेताओं ने इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। नीचे प्रमुख देशों की प्रतिक्रियाओं का विवरण दिया गया है:
संयुक्त राज्य अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल के हमलों से दूरी बनाते हुए कहा कि अमेरिका इस कार्रवाई में शामिल नहीं है। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि वह परमाणु समझौता कर ले, अन्यथा उसे और बड़े हमलों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी स्पष्ट किया कि यह इजरायल की एकतरफा कार्रवाई थी।
US State Department (@StateDept): We are not involved in Israel's military actions against Iran. Our priority is the safety of American forces and citizens in the region. We urge all parties to exercise restraint.
सऊदी अरब
सऊदी अरब ने इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की और ईरान को "भाई जैसे देश" बताया। सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इजरायल की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है।
Saudi Foreign Ministry (@KSAmofaEN): The Kingdom of Saudi Arabia strongly condemns Israel's aggression against our brotherly nation, Iran. Such actions threaten regional stability and must be stopped.
पाकिस्तान
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने इजरायल के हमलों की निंदा की और कहा कि यह तनाव तीसरे विश्व युद्ध का जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया कि ईरान के लिए युद्ध लड़ना पाकिस्तान के हित में नहीं है। कथित ईरानी बयान में पाकिस्तान का उल्लेख होने के बावजूद, कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बयान पर नहीं आई है।
Bilawal Bhutto (@BBhuttoZardari): Pakistan cannot afford the risk of a third world war. We condemn Israel's attacks on Iran and call for peace.
भारत
भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने और शांति वार्ता को बढ़ावा देने की अपील की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर नजर रख रहा है और अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली पीएम नेतन्याहू से फोन पर बात की और क्षेत्र में शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।
Narendra Modi (@narendramodi): Received a call from PM @netanyahu of Israel. He briefed me on the evolving situation. I shared India's concerns and emphasized the need for early restoration of peace and stability in the region.
अन्य देश
- रूस और चीन: दोनों देशों ने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की और ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त की।
- जॉर्डन: जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन को अस्वीकार्य बताया।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर: दोनों देशों ने इजरायल की निंदा की और शांति वार्ता की वकालत की।
- ओमान: ओमान ने इजरायल को तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
4. वर्तमान स्थिति: तेल की कीमतों और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
इजरायल के हमलों के बाद तेल की कीमतों में 6% से अधिक की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान होर्मूज की खाड़ी को बंद करता है, तो तेल की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है, जबकि इजरायल ने दावा किया है कि उसका अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
5. आगे क्या?
ईरान और इजरायल के बीच तनाव ने मध्य पूर्व को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। कथित ईरानी बयान की सत्यता संदिग्ध है, लेकिन यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा सकता है। विश्व नेताओं ने संयम और कूटनीति का आह्वान किया है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ती शत्रुता शांति की संभावनाओं को कमजोर कर रही है।
अमेरिका और अन्य देशों की कूटनीतिक कोशिशें अभी भी जारी हैं, लेकिन यदि ईरान और इजरायल के बीच युद्ध बढ़ता है, तो इसका प्रभाव न केवल मध्य पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
स्रोत
- Media Reports
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