प्रेरणादायक क़िता: उठो, बढ़ो! - Furkan S Khan

फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित प्रेरणादायक क़िता 'उठो, बढ़ो!'। यह कविता आपको जीवन की मुश्किलों का सामना करने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देगी।

Monday, August 24, 2026
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प्रेरणादायक क़िता: उठो, बढ़ो! - Furkan S Khan
“प्रेरणादायक क़िता: उठो, बढ़ो! - Furkan S Khan”
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https://vews.in/motivational-qita-rise-move-forward-furkan-s-khan
Date
24 August 2026
Qita — By Furkan S Khan
पथ कठिन है तो क्या हुआ, हिम्मत ना हारो तुम। मंज़िलें मिलेंगी ज़रूर, बस कदम बढ़ाओ तुम। हर मुश्किल को चीरकर, आगे बढ़ते जाओ तुम। जीत तुम्हारी ही होगी, बस चलते जाओ तुम।
Qita — By Furkan S Khan
अंधेरों से ना घबराना, इक किरण बाकी है। दिल में जगा ले हौसला, अभी उड़ान बाकी है। हर चुनौती से लड़ना है, ये इम्तिहान बाकी है। नया सवेरा आएगा, बस थोड़ी जान बाकी है।
Qita — By Furkan S Khan
संघर्षों से ना घबराना, मंज़िल दूर नहीं कभी। जो डटे रहे मैदान में, वो हारे नहीं कभी। मेहनत का फल मिलता है, ये बात भूलो नहीं कभी। विश्वास जो रखता मन में, वो टूटा नहीं कभी।

उठो, बढ़ो!

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: हारो, बढ़ाओ, जाओ  |  Radeef: तुम
पथ कठिन है तो क्या हुआ, हिम्मत ना हारो तुम। मंज़िलें मिलेंगी ज़रूर, बस कदम बढ़ाओ तुम। हर मुश्किल को चीरकर, आगे बढ़ते जाओ तुम। जीत तुम्हारी ही होगी, बस चलते जाओ तुम।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: किरण, उड़ान, इम्तिहान, जान  |  Radeef: बाकी है
अंधेरों से ना घबराना, इक किरण बाकी है। दिल में जगा ले हौसला, अभी उड़ान बाकी है। हर चुनौती से लड़ना है, ये इम्तिहान बाकी है। नया सवेरा आएगा, बस थोड़ी जान बाकी है।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: दूर, हारे, भूलो, टूटा  |  Radeef: नहीं कभी
संघर्षों से ना घबराना, मंज़िल दूर नहीं कभी। जो डटे रहे मैदान में, वो हारे नहीं कभी। मेहनत का फल मिलता है, ये बात भूलो नहीं कभी। विश्वास जो रखता मन में, वो टूटा नहीं कभी।

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Zainab
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