NCERT कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पुस्तक में बड़े बदलाव: 'आपातकाल', 'SIR' शामिल, प्रस्तावना हटाई गई
एनसीईआरटी की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में 'आपातकाल' व 'SIR' जैसे विषय जुड़े। वहीं, भारतीय संविधान की प्रस्तावना हटा दी गई है।
QR Code
Table of Contents
Key Highlights
- एनसीईआरटी की कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में नए विषय जोड़े गए।
- किताब में 'आपातकाल' और 'SIR' नामक खंडों को शामिल किया गया है।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना को नए संस्करण से हटा दिया गया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों में भारतीय इतिहास के एक अहम दौर 'आपातकाल' और 'SIR' (State, Industry and Rights) जैसे नए विषयों का समावेश प्रमुख है। वहीं, इन संशोधनों के बीच एक उल्लेखनीय परिवर्तन भारतीय संविधान की प्रस्तावना को पुस्तक से हटाना है, जिसने शिक्षाविदों और सार्वजनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
पाठ्यक्रम में नए अध्याय और उनका महत्व
कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में 'आपातकाल' का जोड़ा जाना भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को छात्रों के सामने लाता है। यह खंड देश में 1975 से 1977 के बीच की अवधि, उसके कारण, प्रभाव और भारतीय राजनीति पर उसके दूरगामी परिणामों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेगा। इससे युवा पीढ़ी को देश के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी। 'SIR' यानी 'राज्य, उद्योग और अधिकार' नामक अध्याय छात्रों को आर्थिक विकास, सरकारी नीतियों और नागरिकों के अधिकारों के बीच जटिल संबंधों को समझने में मदद करेगा। यह उन्हें सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में राज्य की भूमिका पर चिंतन करने का अवसर देगा।
संविधान की प्रस्तावना का हटाया जाना: एक विमर्श
जहां नए विषयों का समावेश हुआ है, वहीं भारतीय संविधान की प्रस्तावना को कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से हटा दिया गया है। यह वह महत्वपूर्ण पाठ है जो भारतीय संविधान के मूल आदर्शों, दर्शन और मूल्यों को संक्षिप्त रूप से प्रस्तुत करता है। आमतौर पर, यह स्कूली पाठ्यपुस्तकों का एक अभिन्न अंग रहा है, जो छात्रों को बचपन से ही संवैधानिक साक्षरता और नागरिक अधिकारों की समझ देता है। इस बदलाव पर कई शिक्षाविदों और नागरिक समूहों ने चिंता व्यक्त की है, उनका मानना है कि प्रस्तावना संवैधानिक भावना को समझने के लिए एक बुनियादी स्तंभ है।
NCERT का 'युक्तिकरण' और भविष्य की दिशा
एनसीईआरटी ने पूर्व में भी अपने पाठ्यक्रम में कई 'युक्तिकरण' (rationalisation) अभ्यास किए हैं, जिसका उद्देश्य छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करना और सामग्री को अधिक प्रासंगिक बनाना है। परिषद का तर्क रहा है कि ऐसे बदलाव वैश्विक शैक्षिक मानकों और समकालीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। हालांकि, संविधान की प्रस्तावना को हटाने का निर्णय इस 'युक्तिकरण' के दायरे में आने वाले अन्य बदलावों से अलग खड़ा है, क्योंकि यह देश के मौलिक कानूनी दस्तावेज के सार से जुड़ा है। इन परिवर्तनों का शिक्षा प्रणाली और छात्रों की संवैधानिक समझ पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह समय के साथ ही स्पष्ट हो पाएगा।
इन महत्वपूर्ण शैक्षणिक बदलावों पर अधिक विस्तृत समाचारों और विश्लेषण के लिए Vews.in पर बने रहें।
This content was generated with the help of artificial intelligence.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
The world’s news & beautiful Shayari, brought to you by AI. Powered by vews.in.
Related Posts
बंगाल में VHP के दुर्गा पूजा 'निर्देश' क्यों बेअसर रहे?
धुंधली पड़ताल: असम का पुराना वीडियो BJP MLA के नाम प...
फैक्ट-चेक: बांग्लादेश की डकैती का पुराना वीडियो सांप...
SCO में पीएम मोदी: पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता तय, जि...
फिरोजपुर में AAP नेता गुरप्रीत सिंह गोपी की गोली मार...
नेपाल बाढ़: हिमालयी चेतावनी, क्या भारत के पर्वतीय रा...
Security Check
Please complete the captcha to verify you are human.
25°C Bahraich
Comments (0)