जीवन की राहें

Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: इम्तिहाँ, मकां, निशाँ, बयाँ, जहाँ, गुमाँ

Radeef: क्या है


हर लम्हा यहाँ एक नया इम्तिहाँ क्या है,
ये ज़िंदगी क्या है, इसका मकां क्या है।
कभी धूप है, कभी छाँव, ये कैसा सफ़र,
इस राह में सुकून का निशाँ क्या है।
मिली है जो साँसें, इनका हिसाब क्या है,
खुदा की इस रहमत का बयाँ क्या है।
कभी हँसते हैं, कभी रोते हैं बे-सबब,
इस दिल की धड़कनों का जहाँ क्या है।
फ़ुरक़ान, ये दुनिया फ़ानी है, समझ ले तू,
इस फ़ानी दुनिया में तेरा गुमाँ क्या है।



Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: सफ़र, मंज़र, असर, ख़बर, हुनर

Radeef: नज़र आता है


ये जीवन एक ख़ूबसूरत सफ़र नज़र आता है,
हर मोड़ पर एक नया मंज़र नज़र आता है।
कभी उम्मीद की किरण, कभी मायूसी का साया,
हर चेहरे में एक अलग असर नज़र आता है।
जो गुज़रा वो कल, जो आने वाला वो कल,
हर पल एक अनकही ख़बर नज़र आता है।
सीख ले कुछ तो, ऐ दिल, इस दुनिया से तू,
हर साँस में जीने का हुनर नज़र आता है।
फ़ुरक़ान, ये दुनिया फ़ानी है, ये खेल है,
हर चीज़ में रब का ही असर नज़र आता है।