आत्म-प्रेम: राष्ट्र का गौरव | देशभक्ति हिंदी कविता | Furkan S Khan

Furkan S Khan द्वारा रचित यह देशभक्ति कविता आत्म-प्रेम के महत्व को दर्शाती है, जो राष्ट्र के गौरव और स्वाभिमान का आधार है। अपनी अस्मिता को पहचानो और देश को महान बनाओ।

Sunday, September 20, 2026
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आत्म-प्रेम: राष्ट्र का गौरव | देशभक्ति हिंदी कविता | Furkan S Khan
“आत्म-प्रेम: राष्ट्र का गौरव | देशभक्ति हिंदी कविता | Furkan S Khan”
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20 September 2026
आत्म-प्रेम: राष्ट्र का गौरव | देशभक्ति हिंदी कविता | Furkan S Khan
Patriotic Poetry — By Furkan S Khan
मैं हूँ तो मेरा वतन है, मुझमें इसकी पहचान है, मेरी हर साँस में गूँजता, इसका ही तो अभिमान है। जो स्वयं से प्यार न करूँ, भला कैसे करूँ देश से? मेरा अस्तित्व ही तो जुड़ा है, इसकी हर एक भेष से। मेरी शक्ति, मेरा साहस, मेरी ही तो शान है, मुझसे ही तो बनता है ये, मेरा हिन्दुस्तान है। गर मैं खड़ा हूँ सर उठाकर, तो देश का भी मान है, मेरी निष्ठा, मेरी मेहनत, इसका ही तो दान है। हर कण में बसी है मिट्टी, मेरे खून में बहता पानी, मैं ही तो हूँ वो नक्षत्र, जो लिखेगा नई कहानी। अपनी अस्मिता को जानूँ, तो राष्ट्र का भी ज्ञान है, मेरा स्वाभिमान ही तो, मेरे देश का महान है। निर्भीक होकर जियूँ मैं, यही मेरा आह्वान है, स्वयं से प्रेम ही तो, राष्ट्र का सबसे बड़ा सम्मान है।
Patriotic Poetry — By Furkan S Khan
जो भीतर है, वो ज्योति जगाओ, अंधकार मिटाओ तुम, अपनी पहचान को समझो, स्वयं को फिर से पाओ तुम। ये देश तुम्हारा दर्पण है, तुम इसमें खुद को देखो, अपनी क्षमता पहचानो, हर बाधा को भेदो तुम। तुम्हारा हर कदम, हर सोच, वतन को राह दिखाती है, तुम्हारी अदम्य इच्छाशक्ति, देश को आगे बढ़ाती है। न सोचो तुम अकेले हो, हर एक में राष्ट्र समाया है, ये संस्कृति, ये गौरव, तुमने ही तो संवारा है। जो खुद पर है विश्वास नहीं, तो कैसे देश पर होगा? जो अपने ही पथ से भटके, तो किसे मार्ग बताएगा? उठो, जागो, स्वयं को जानो, यही राष्ट्र का आह्वान है, तुम्हारी हर सफलता ही, इस देश का अभिमान है। हर सृजन में तुम्हारी शक्ति, हर विजय में तुम्हारा नाम है, स्वयं की ज्योति से ही रोशन, ये प्यारा हिन्दुस्तान है।
Patriotic Poetry — By Furkan S Khan
जो खुद की इज़्ज़त करता है, वही देश का मान बढ़ाता है, अपने स्वाभिमान की लौ से, वो हर घर रोशन कर जाता है। मेरा आत्म-सम्मान ही तो, मेरे राष्ट्र का गौरव है, मेरी पहचान से ही तो, इस देश का वैभव है। मैं उठूँ, मैं चलूँ, मैं बढ़ूँ, तो देश भी संग चलता है, मेरी हर साँस में भारत, मेरी धड़कन में बसता है। ये मिट्टी मेरी जननी है, इसका मुझ पर हक है, इसकी विरासत को सँवारना, मेरा अटल संकल्प है। न डरूँ, न झुकूँ कभी, यही मेरा धर्म है, आत्म-प्रेम से ही तो, ये वतन महान है, ये मेरा कर्म है। हर भारतीय में बसे शक्ति, वो अखंड, वो अमर रहे, स्वयं को जो पूजेगा, वो देश को भी प्यार करे। मेरा सम्मान है तो, मेरा भारत भी महान है, यही प्रेम, यही निष्ठा, मेरी सच्ची पहचान है।

अस्मिता: स्वयं का अस्तित्व या पहचान। नक्षत्र: तारा, यहाँ भाग्यविधाता के अर्थ में। निर्भीक: निडर, बिना किसी भय के। अभिमान: गर्व, स्वाभिमान। आह्वान: पुकार, चुनौती।

ज्योति: प्रकाश, आंतरिक ऊर्जा। अदम्य: जिसे दबाया न जा सके, प्रबल। संस्कृति: सभ्यता, रीति-रिवाज। सृजन: निर्माण, रचना।

गौरव: सम्मान, प्रतिष्ठा। विरासत: पूर्वजों से प्राप्त धरोहर। अखंड: जिसके टुकड़े न किए जा सकें, अविभाजित। अमर: जो कभी न मरे, शाश्वत।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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