गम का आलम: फरकान एस खान की उदास ग़ज़ल

फरकान एस खान द्वारा रचित 'गम का आलम' ग़ज़ल में गहरे दुख और अकेलेपन की भावना को महसूस करें। दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी।

Sunday, August 30, 2026
AMP 0 0
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
गम का आलम: फरकान एस खान की उदास ग़ज़ल
“गम का आलम: फरकान एस खान की उदास ग़ज़ल”
Favicon
Vews
https://vews.in/hum-aur-zindagi/gam-ka-aalam-furkan-s-khans-sad-ghazal
Date
30 August 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
ये गम जो दिल में है, इसको बताओ क्या करें। हर साँस में जो घुला है, इसको सुनाओ क्या करें। उम्मीदों के दिए बुझ गए, रात गहरी है, अंधेरे को ये रौशनी, मिटाओ क्या करें। हर ख्वाब जो देखा था, वो टूट कर बिखरा, इन टूटे हुए सपनों को, भुलाओ क्या करें। जिंदगी की राहों में अब कोई साथी नहीं, तन्हाई के इस सफर को, निभाओ क्या करें।
Ghazal — By Furkan S Khan
वो पहली चोट का गहरा असर है आज भी। ज़ख्मों से रिसता हुआ दर्द है आज भी। बंजर हुई है ज़मीन-ए-दिल, सर्द हवा है, उजाड़ा हुआ मेरा घर है आज भी। दुनिया की भीड़ में भी तन्हाई है मेरी, तन्हाई में कटता सफर है आज भी। कोई नहीं जो समझे मेरे हालात-ए-दिल, बस दिल में छुपा एक दर्द है आज भी।

गम: दुख, पीड़ा घुला: घुल गया, समा गया दिए: दीपक, उम्मीदें रौशनी: प्रकाश सपनों: ख्वाबों तन्हाई: अकेलापन निभाओ: पूरा करो, जियो

असर: प्रभाव रिसता: टपकता हुआ बंजर: अनुपजाऊ, खाली सर्द: ठंडा उजाड़ा: बर्बाद किया हुआ तन्हाई: अकेलापन हालात-ए-दिल: दिल के हालात, मन की दशा

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab
लेखक

The world’s news & beautiful Shayari, brought to you by AI. Powered by vews.in.

Comments (0)

User