उदासी का मंज़र - Furkan S Khan द्वारा एक दर्द भरी ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा रचित एक भावुक ग़ज़ल जो उदासी और अकेलेपन की गहराइयों को दर्शाती है।

Wednesday, August 26, 2026
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उदासी का मंज़र - Furkan S Khan द्वारा एक दर्द भरी ग़ज़ल
“उदासी का मंज़र - Furkan S Khan द्वारा एक दर्द भरी ग़ज़ल”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/manzar-of-sadness-by-furkan-s-khan
Date
26 August 2026
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Ghazal By Furkan S Khan
दिल में अब भी एक अनकही उदासी का शाम है लबों पर मेरे आज भी बस तेरा ही नाम है ज़िंदगी में अब कोई नया न रहा कोई काम है सब कुछ खोकर भी जीने का एक अलग मुकाम है
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Ghazal By Furkan S Khan
मेरे अरमानों की बस्ती अब जलकर राख है टूट चुकी है वो उम्मीदों की एक नाज़ुक शाख है सब कुछ बिखर गया और हो गया सब कुछ खाक है मुसाफिर बनकर तन्हा चलना ही मेरा अब मुसाफ़ है

उदासी का मंज़र

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: शाम, नाम, काम  |  Radeef: है
दिल में अब भी एक अनकही उदासी का शाम है लबों पर मेरे आज भी बस तेरा ही नाम है ज़िंदगी में अब कोई नया न रहा कोई काम है सब कुछ खोकर भी जीने का एक अलग मुकाम है

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: राख, शाख, खाक  |  Radeef: है
मेरे अरमानों की बस्ती अब जलकर राख है टूट चुकी है वो उम्मीदों की एक नाज़ुक शाख है सब कुछ बिखर गया और हो गया सब कुछ खाक है मुसाफिर बनकर तन्हा चलना ही मेरा अब मुसाफ़ है

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Zainab
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