उदासी का मंज़र - Furkan S Khan द्वारा एक दर्द भरी ग़ज़ल
Furkan S Khan द्वारा रचित एक भावुक ग़ज़ल जो उदासी और अकेलेपन की गहराइयों को दर्शाती है।
दिल में अब भी एक अनकही उदासी का शाम है
लबों पर मेरे आज भी बस तेरा ही नाम है
ज़िंदगी में अब कोई नया न रहा कोई काम है
सब कुछ खोकर भी जीने का एक अलग मुकाम है
Kaafiya शाम, नाम, काम
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
मेरे अरमानों की बस्ती अब जलकर राख है
टूट चुकी है वो उम्मीदों की एक नाज़ुक शाख है
सब कुछ बिखर गया और हो गया सब कुछ खाक है
मुसाफिर बनकर तन्हा चलना ही मेरा अब मुसाफ़ है
Kaafiya राख, शाख, खाक
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
उदासी का मंज़र
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: शाम, नाम, काम | Radeef: है
दिल में अब भी एक अनकही उदासी का शाम है
लबों पर मेरे आज भी बस तेरा ही नाम है
ज़िंदगी में अब कोई नया न रहा कोई काम है
सब कुछ खोकर भी जीने का एक अलग मुकाम है
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: राख, शाख, खाक | Radeef: है
मेरे अरमानों की बस्ती अब जलकर राख है
टूट चुकी है वो उम्मीदों की एक नाज़ुक शाख है
सब कुछ बिखर गया और हो गया सब कुछ खाक है
मुसाफिर बनकर तन्हा चलना ही मेरा अब मुसाफ़ है
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