अल्लाह पर भरोसा: इस्लामिक आत्मविश्वास पर हिन्दी कविता

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई यह हिन्दी इस्लामिक कविता अल्लाह पर अटूट विश्वास और आत्मविश्वास की भावना को व्यक्त करती है, जो जीवन की हर चुनौती में एक सहारा है।

Monday, September 21, 2026
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अल्लाह पर भरोसा: इस्लामिक आत्मविश्वास पर हिन्दी कविता
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21 September 2026
अल्लाह पर भरोसा: इस्लामिक आत्मविश्वास पर हिन्दी कविता
Islamic Poetry — By Furkan S Khan
जब यकीन हो उस रब पर, तो क्या डर है? हर मुश्किल में वही तो सहारा है। दुनिया की राहें चाहे कितनी भी हों कठिन, उसकी रहमत का दरिया हमेशा साथ है। अंधेरों से न घबरा, वो नूर का सागर है, हर आरज़ू, हर दुआ का वो ही तो हाकिम है। जब उसके हाथ में डोर, तो क्यों हो मायूसी? हर पल, हर साँस में उसका ही तो अहसास है। बुलंदी पर पहुँचना है तो थाम ले दामन उसका, वही तो है जो हर चाहत को पूरी करता है। तू बस चलता रह उसकी राहों पर ऐ बंदे, तेरा हर कदम, हर फैसला उसी पर आधारित है। ये दुनिया फानी, वो ही बाकी है, उस पर भरोसा ही तेरा सच्चा विश्वास है। हर मुश्किल में, हर घड़ी, बस यही पुकार है, अल्लाह पर यकीन ही सबसे बड़ी आस है।

रब: ईश्वर रहमत: कृपा, दया आरज़ू: इच्छा, अभिलाषा हाकिम: शासक, मालिक मायूसी: निराशा अहसास: अनुभव, एहसास बुलंदी: ऊँचाई, शिखर दामन: आँचल, सहारा फानी: नश्वर बाकी: शाश्वत, स्थायी

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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