यादों का अनमोल ख़ज़ाना: दिल छू लेने वाली प्रेम कविता | Furkan S Khan
फ़ुरकान एस ख़ान की यह ख़ूबसूरत प्रेम कविता 'यादों का अनमोल ख़ज़ाना' उन अनमोल पलों को समर्पित है जो प्यार में हमेशा साथ रहते हैं। पढ़ें और खो जाएँ मीठी यादों में।
अनमोल: बहुत कीमती। ख़ज़ाना: धन का संग्रह, यहाँ यादों का संग्रह। अंदाज़: शैली, तरीका। साया: परछाई, यहाँ मौजूदगी का एहसास। गुनगुनाया: धीरे-धीरे गाया गया। पिघलना: घुल जाना, खो जाना। मौजूद: उपस्थित। सुकून: शांति, आराम। रेशमी: रेशम जैसा कोमल। स्पर्श: छूना, अहसास। नव वर्ष: नया साल, यहाँ नई ऊर्जा या आशा। रूह: आत्मा।
लम्हे: पल, क्षण। ख़ामोश: शांत। गूँज: प्रतिध्वनि। छुअन: स्पर्श। भाती है: अच्छी लगती है। आँगन: घर का खुला स्थान। ख़्वाब: सपना। बेसब्री: अधीरता। तकता है: देखता है, इंतज़ार करता है। दहलीज: देहली, द्वार। किरण: प्रकाश की रेखा। उभरती है: प्रकट होती है। ज़रूरी: आवश्यक। अधूरी: अपूर्ण। सिलसिला: क्रम, श्रंखला। गुलशन: बाग़, बगीचा।
आशियाना: घोंसला, घर, ठिकाना। लम्हा: पल, क्षण। सूनी: खाली, वीरान। ज़हन: मन, मस्तिष्क। रच-बस जाती हैं: घुल-मिल जाती हैं। शाखें: पेड़ की टहनियाँ। तन्हा: अकेला। पनाह: शरण, आश्रय। सुकून: शांति, आराम। हिम्मत: साहस। सहारा: समर्थन। बहार: वसंत, रौनक। रूह: आत्मा। वीरान: उजाड़, ख़ाली। रौशन: प्रकाशित, उज्ज्वल। चिराग़: दीपक।
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