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हम और ज़िंदगी
अश्कों का सैलाब: दिल को छू लेने वाली उदास कविता
Furkan S Khan की यह क़िता उदासी और अकेलेपन के गहरे एहसास को बयां करती है। जब दिल गम से भरा हो और आँखों से आँसू बहते हों, ऐसे पलों को शब्दों में पिरोया गया है।
Qita — By Furkan S Khan
गम का साया दिल पर गहरा है,
हर खुशी का पल जैसे ठहरा है.
सूनी राहों पर बस यादों का पहरा है,
अश्कों का दरिया आँखों से बहता है.
Qita — By Furkan S Khan
दिल की बस्ती में अब रौनक नहीं,
कोई उम्मीद की किरण दिखती नहीं.
यादों के साए में रात कटती नहीं,
क्यों ये उदासी मुझसे हटती नहीं.
Qita — By Furkan S Khan
भीड़ में भी खुद को तन्हा पाया था,
हर मुस्कान के पीछे दर्द छुपाया था.
खामोशी का शोर दिल में गहराया था,
किसने कहा मेरा दिल मुस्कुराया था?
अश्कों का सैलाब
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: गहरा, ठहरा, पहरा, बहता | Radeef: है
गम का साया दिल पर गहरा है,
हर खुशी का पल जैसे ठहरा है.
सूनी राहों पर बस यादों का पहरा है,
अश्कों का दरिया आँखों से बहता है.
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: रौनक, दिखती, कटती, हटती | Radeef: नहीं
दिल की बस्ती में अब रौनक नहीं,
कोई उम्मीद की किरण दिखती नहीं.
यादों के साए में रात कटती नहीं,
क्यों ये उदासी मुझसे हटती नहीं.
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: पाया, छुपाया, गहराया, मुस्कुराया | Radeef: था
भीड़ में भी खुद को तन्हा पाया था,
हर मुस्कान के पीछे दर्द छुपाया था.
खामोशी का शोर दिल में गहराया था,
किसने कहा मेरा दिल मुस्कुराया था?
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