सोनिया गांधी का 'खामोश आवाज' ओप-एड: गाजा पर केंद्र सरकार की नीति पर तीखा हमला
सोनिया गांधी ने गाजा संकट पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी की कड़ी आलोचना करते हुए एक लेख लिखा है, जिसमें भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
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Key Highlights
- सोनिया गांधी ने गाजा संकट पर केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की है।
- उन्होंने एक ओप-एड लेख के माध्यम से अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं।
- भारत की पारंपरिक विदेश नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में गाजा में चल रहे संघर्ष और इस पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए एक तीखा ओप-एड लेख लिखा है। इस लेख में उन्होंने भारत की पारंपरिक विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए, सरकार के वर्तमान रुख की आलोचना की है। 'खामोश आवाज की अकेली पुकार' शीर्षक वाला यह लेख कई प्रमुख बिंदुओं पर सरकार को घेरता है।
'खामोश आवाज' का मुखर प्रतिपादन
सोनिया गांधी ने अपने लेख में गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने इजरायली हमलों में हजारों निर्दोष नागरिकों की मौत, विशेषकर बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाने की कड़ी निंदा की। गांधी ने रेखांकित किया कि भारत का हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन करने का एक मजबूत इतिहास रहा है। यह लेख ऐसे समय में आया है जब गाजा में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर बंटा हुआ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने हमेशा से ही मानवता और न्याय के सिद्धांतों का पालन किया है। गाजा में जो हो रहा है, वह इन सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर एक अस्पष्ट और तटस्थ रुख अपनाए हुए है, जो भारत की नैतिक स्थिति के विपरीत है।
भारत की पारंपरिक स्थिति पर सवाल
गांधी ने अपने ओप-एड में भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे जवाहरलाल नेहरू से लेकर बाद के प्रधानमंत्रियों तक, भारत ने हमेशा फिलिस्तीनी राज्य के लिए समर्थन व्यक्त किया है। उनका मानना है कि वर्तमान सरकार ने इस लंबी-चौड़ी परंपरा को त्याग दिया है। यह एक गंभीर बदलाव है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट में भारत को एक अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी। मानवीय सहायता पहुँचाने और युद्धविराम का आह्वान करने में भारत की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित थी। इस कथित चुप्पी को गांधी ने भारत के अंतरराष्ट्रीय कद और नैतिक जिम्मेदारी के लिए एक झटका बताया है।
राजनीतिक गलियारों में गूंज
सोनिया गांधी के इस ओप-एड से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्षी दल इसे सरकार की विदेश नीति पर एक महत्वपूर्ण आलोचना के रूप में देख रहे हैं। जबकि सत्तारूढ़ दल ने इस पर सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, यह स्पष्ट है कि इस लेख ने गाजा मुद्दे पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। यह दिखाता है कि एक अनुभवी नेता के रूप में सोनिया गांधी की आवाज आज भी मायने रखती है। उनके शब्दों ने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट पर राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा दी है।
गाजा में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। भारत के रुख पर यह ओप-एड आगे की चर्चा को बढ़ावा देगा। इस विषय पर अधिक विस्तृत समाचार कवरेज के लिए, Vews.in पर आते रहें।
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