निकट परियोजना मंजूरी विवाद: भूपेंद्र यादव ने जयराम रमेश के दावों को सिरे से खारिज किया
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने निकोबार परियोजना की मंजूरी को लेकर जयराम रमेश के पर्यावरणीय उल्लंघन के आरोपों का खंडन किया है।
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मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने निकोबार परियोजना पर जयराम रमेश के दावों को दृढ़ता से खारिज किया।
- रमेश ने परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी में अनियमितताओं का आरोप लगाया था।
- यादव ने सभी प्रक्रियाओं के नियमानुसार पालन का आश्वासन दिया।
नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ग्रेट निकोबार द्वीप समूह परियोजना को मिली पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है, और आरोपों में कोई सत्यता नहीं है।
जयराम रमेश ने हाल ही में दावा किया था कि इस मेगा परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी में कई गंभीर अनियमितताएं और उल्लंघन हुए हैं। उनके अनुसार, यह परियोजना पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगी। रमेश ने सरकार पर पर्यावरणीय मानदंडों की अनदेखी का आरोप लगाया था।
भूपेंद्र यादव ने इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय मूल्यांकन वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से किए गए हैं। मंत्री ने संसद के रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों का हवाला देते हुए बताया कि हर कदम पर नियमों का सख्ती से पालन किया गया है। उन्होंने कहा, 'हमने किसी भी प्रक्रिया में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया है।'
यह परियोजना, जिसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक टाउनशिप और एक सोलर पावर प्लांट का निर्माण करना है, देश के रणनीतिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इसकी विशालता और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के अद्वितीय जैव विविधता वाले क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह लगातार पर्यावरणविदों और राजनीतिक नेताओं की निगरानी में रही है।
यादव ने अपने बयान में रमेश द्वारा उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर जवाब देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए विस्तृत प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की गई थी। साथ ही, वन्यजीव और वन संरक्षण कानूनों के तहत सभी मंजूरियां ली गई हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि स्थानीय समुदायों और स्टेकहोल्डर्स से भी परामर्श किया गया है।
इस आरोप-प्रत्यारोप के दौर ने एक बार फिर पर्यावरण बनाम विकास की बहस को हवा दे दी है। सरकार परियोजना को 'आत्मनिर्भर भारत' और क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रही है, वहीं विपक्ष और कुछ पर्यावरण समूह इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों पर चिंता जता रहे हैं। देश में विकास और पर्यावरण के संतुलन पर बहस हमेशा से अहम रही है, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार चर्चा होती रहती है।
फिलहाल, भूपेंद्र यादव के स्पष्टीकरण के बाद भी यह मुद्दा शांत होता नहीं दिख रहा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अभी तक इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक गलियारों में इस परियोजना को लेकर बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।
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