‘चिंकी’, ‘चाइनीज़’: पूर्वोत्तर भारत के लोगों का वो रोज़मर्रा का दर्द जो हम अनदेखा करते हैं

पूर्वोत्तर भारत के लोग ‘चिंकी’ और ‘चाइनीज़’ जैसे नस्लवादी शब्दों का सामना करते हैं। जानें इस रोज़मर्रा के भेदभाव का दर्द और इसके गंभीर सामाजिक प्रभाव।

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‘चिंकी’, ‘चाइनीज़’: पूर्वोत्तर भारत के लोगों का वो रोज़मर्रा का दर्द जो हम अनदेखा करते हैं
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07 March 2026
‘चिंकी’, ‘चाइनीज़’: पूर्वोत्तर भारत के लोगों का वो रोज़मर्रा का दर्द जो हम अनदेखा करते हैं
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'चिंकी', 'चाइनीज़': पूर्वोत्तर भारत के लोगों का वो रोज़मर्रा का दर्द जो हम अनदेखा करते हैं

भारत एक विविधताओं का देश है, जहां विभिन्न संस्कृतियां, भाषाएं और रंग एक साथ पनपते हैं। लेकिन इस विविधता के बीच, एक स्याह सच भी छिपा है - पूर्वोत्तर भारत के लोगों के खिलाफ होने वाला रोज़मर्रा का नस्लवाद। अक्सर उन्हें 'चिंकी' या 'चाइनीज़' जैसे अपमानजनक शब्दों से बुलाया जाता है, जो उनकी पहचान और भारतीयता पर सीधा हमला है। यह केवल कुछ चुनिंदा घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या है जो उनके जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है।

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