फ़ेक न्यूज़ फैलाती भारतीय मीडिया और पोल खोलती वाशिंगटन पोस्ट | भारत और पाकिस्तान
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय टेलीविज़न मीडिया ने जो रिपोर्टिंग की, उसे लेकर अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट ने कड़ी आलोचना की है।
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ऑपरेशन सिंदूर: वाशिंगटन पोस्ट ने खोली भारतीय मीडिया की पोल
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय टेलीविज़न मीडिया ने जो रिपोर्टिंग की, उसे लेकर अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट ने कड़ी आलोचना की है। पोस्ट के अनुसार, भारत के बड़े-बड़े चैनलों ने झूठी और अपुष्ट खबरें प्रसारित कीं, जिनमें वीडियो गेम और विदेशी संघर्षों के फुटेज का इस्तेमाल तक किया गया।
झूठी "ब्रेकिंग न्यूज़" और वीडियो गेम फुटेज
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख की गिरफ्तारी जैसी झूठी खबरें प्रसार भारती से लीक हुईं, जिसे एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर डाला और उसके बाद तमाम न्यूज़ चैनलों ने उसे 'ब्रेकिंग न्यूज़' बना दिया। टाइम्स नाउ नवभारत ने दावा किया कि भारतीय सेना पाकिस्तान में घुस गई है, टीवी9 भारतवर्ष ने कहा कि पाक प्रधानमंत्री ने आत्मसमर्पण कर दिया है, और भारत समाचार ने उन्हें बंकर में छिपा हुआ बताया। इन झूठी रिपोर्टों के समर्थन में चैनलों ने ग़ाज़ा, सूडान और यहां तक कि वीडियो गेम के दृश्य भी प्रसारित किए।

मीडिया की गिरती साख और सरकारी दबाव
पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि कभी सरकार की जवाबदेही तय करने वाला स्वतंत्र प्रेस, अब सरकारी प्रचार का हिस्सा बन गया है। पत्रकारों पर राजद्रोह, मानहानि और आतंकवाद जैसे कड़े क़ानून लगाए गए, टैक्स जांचों और धमकियों से उन्हें चुप कराया गया। रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कुछ चैनल अब सरकार की 'आवाज़' बन गए हैं चाहे वैचारिक तालमेल हो या सत्ता का दबाव।
अखबारों और एंकरों की भूमिका
इंडिया टुडे की एंकर श्वेता सिंह ने कराची को "1971 के बाद का सबसे बड़ा बुरा सपना" बताया, जबकि कराची पोर्ट ट्रस्ट ने उसी सुबह साफ किया कि वहां कोई हमला नहीं हुआ। कुछ हिंदी अखबारों ने इस झूठ को अपने पहले पन्ने पर छापा। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने इन झूठों को टीवी डिबेट्स में गंभीरता दी, और ब्रेकिंग न्यूज़ में हवाई हमलों की आवाजें बजाईं। सरकार को यहाँ तक कहना पड़ा कि कृपया ग्राफिक्स में ऐसे सायरन इस्तेमाल न करें।
पाकिस्तान की भूमिका भी कम नहीं
पाकिस्तानी मीडिया ने भी इसी तरह की झूठी खबरें फैलाईं भारत द्वारा अफगानिस्तान पर बमबारी, भारतीय सेना मुख्यालय को तबाह करने के दावे। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने झूठी क्लिप्स दिखाकर ग़लत व्याख्या की।
NDTV, आजतक और इंडिया टुडे रहे खामोश
NDTV, आजतक, ज़ी न्यूज़, एबीपी, और प्रसार भारती जैसे तमाम बड़े नेटवर्क वाशिंगटन पोस्ट के सवालों का जवाब देने से बचते रहे। NDTV के रिपोर्टर की एक "हॉट माइक" क्लिप भी सामने आई, जिसमें वे झल्लाकर कहते हैं: "पहले कहते हो अपडेट दो, फिर कहते हो तुमने फर्ज़ी क्यों दिया?" सरकारी अधिकारी की स्वीकारोक्ति: "झूठ से मिला फायदा" एक वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी ने वाशिंगटन पोस्ट से कहा: "गलत जानकारी फैलाना युद्ध का हिस्सा है। यह भारत के लिए फायदेमंद रहा। जितना भ्रम, उतना लाभ।"
सुशांत सिन्हा की सफाई
टाइम्स नाउ नवभारत के एंकर सुशांत सिन्हा ने ऑन एयर बताया कि भारतीय टैंक पाकिस्तान में दाख़िल हो चुके हैं। बाद में उन्होंने सफाई दी: "हर चैनल से एक न एक गलती हुई है, लेकिन हमारी कोई भी गलती भारत के ख़िलाफ़ नहीं थी।"
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय मीडिया की भूमिका पर वाशिंगटन पोस्ट की यह रिपोर्ट केवल एक आलोचना नहीं, बल्कि लोकतंत्र और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल है। भारत के लिए यह आत्ममंथन का समय है—क्या हम सच के साथ खड़े हैं या केवल 'राष्ट्रवाद' के नाम पर भ्रम फैलाने वालों के साथ?
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पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
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