वजीरगंज: कांग्रेस द्वारा वजीरगंज पीड़ितों को भेजी गई सहायता राशि, अमीरों ने भी लूटीं
बहराइच के वजीरगंज में 25 सितंबर को प्रशासन ने 23 घरों पर बुलडोजर चलाया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। कांग्रेस अध्यक्ष अजय राज ने 22 प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। हालांकि, राहत सामग्री में धांधली की शिकायतें हैं, और सक्षम परिवार भी सहायता का लाभ उठा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं।
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बहराइच: कैसरगंज तहसील के वजीरगंज सराय जगना गांव में पिछले माह 25 सितंबर को अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने 23 घरों पर बुलडोजर चला दिया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। इस आपदा के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राज ने पीड़ितों का हाल जानने की कोशिश की और उन्हें सहायता का आश्वासन दिया।
सोमवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अरशद खुर्शीद और प्रदेश संगठन प्रभारी दिनेश सिंह बहराइच पहुंचे। उन्होंने बुलडोजर की कार्रवाई से प्रभावित 22 परिवारों को दस-दस हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ितों के साथ खड़ी है और उन्हें हर संभव मदद देने का प्रयास करेगी।
कानूनी आदेश पर प्रशासन ने किया बुलडोजर का इस्तेमाल, आर्थिक सहायता पर उठे सवाल?
हालांकि, इस मदद की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, बुलडोजर की कार्रवाई में प्रभावित 23 मकान और दुकानों के मालिकों में राजिया, कमाल, कुलसुम और इश्तियाक जैसे गरीब परिवार शामिल हैं, जो अब बेघर हो चुके हैं। इन चारों के पास ना तो कोई जमीन है और ना ही कोई दूसरा आशियाना।
आर्थिक स्थिति और भौतिक नुकसान का विश्लेषण
पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गौर करने पर यह सामने आता है कि अन्य सभी प्रभावित लोगों के पास एक से दो मकान और कई बिघा जमीन है। कुछ तो करोड़पति की सूची में भी शामिल हैं। इनमें से किसी का बेटा या भाई सऊदी अरब में काम कर रहा है, तो कोई डॉक्टर या पत्रकार है। इस प्रकार, यह साफ है कि वास्तविक पीड़ितों की संख्या चार से अधिक नहीं है।
राहत सामग्री में धांधली का आरोप
वहीं, राहत सामग्री के वितरण में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। पीड़ितों के लिए जो भी राहत सामग्री भेजी जा रही है, उसमें वास्तविक पीड़ित कम और लूट खोर ज्यादा हैं। यह चिंता जताई जा रही है कि राहत सामग्री की बंटवारे में जो लोग भी शामिल हैं, वे पीड़ितों के बजाय अन्य लोगों को अधिक सामग्री दे रहे हैं।
इस मामले में समाजसेवी संगठनों और स्थानीय नेताओं ने अपील की है कि राहत सामग्री केवल उन चार परिवारों तक ही सीमित रहनी चाहिए, जो वास्तव में इस आपदा के शिकार हुए हैं।
वजीरगंज के इस मामले में राजनीतिक दलों और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। क्या राजनीतिक सहायता केवल दिखावे के लिए है, या सच में जरूरतमंदों तक पहुंचती है? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका उत्तर ढूंढना आवश्यक है।
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