अमेरिकी व्हाइट हाउस अब रूस से तेल खरीदने के लिए दुनिया से 'भीख' मांग रहा, भारत भी सूची में: ईरानी मंत्री का दावा
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने दावा किया है कि अमेरिका अब रूस से तेल खरीदने के लिए भारत समेत दुनिया से 'गुहार' लगा रहा है, जबकि पहले उसने प्रतिबंध लगाए थे।
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Key Highlights
- ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने दावा किया है कि अमेरिका अब रूस से तेल खरीदने के लिए विभिन्न देशों से 'भीख' मांग रहा है।
- उनका कहना है कि व्हाइट हाउस ने पहले रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे और भारत जैसे देशों को चेतावनी दी थी।
- यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों में अस्थिरता के बीच आया है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नया मोड़ दे रहा है।
अमेरिकी 'यू-टर्न' और ईरानी मंत्री का तीखा तंज
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा है कि जो अमेरिकी अधिकारी पहले दुनिया के देशों को रूस से तेल खरीदने से रोक रहे थे, वही अब रूस से तेल खरीदने के लिए पूरी दुनिया से 'भीख' मांग रहे हैं। इस सूची में भारत जैसे देश भी शामिल हैं, जिन्हें पहले अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ा था।
अमीर-अब्दुल्लाहियान ने यह बयान तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिका की ऊर्जा नीति में आए इस कथित बदलाव पर गहरा तंज कसा। उन्होंने सीधे तौर पर वाशिंगटन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार भारी उथल-पुथल का सामना कर रहा है।
बदलते भू-राजनीतिक समीकरण और तेल बाजार का दबाव
दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिसमें उसके तेल निर्यात को भी निशाना बनाया गया। यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई और तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची तेल कीमतें और ऊर्जा संकट, खासकर यूरोप में, पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। ऐसे में, यह संभव है कि अमेरिका अब वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपनी रणनीति बदल रहा हो, भले ही इसका मतलब रूस से तेल खरीदने की 'अनदेखी' करना हो।
भारत की रणनीतिक ऊर्जा खरीद पर पुरानी बहस
भारत ने शुरुआत से ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूसी तेल की खरीद जारी रखी थी। पश्चिमी देशों के दबाव और प्रतिबंधों की धमकियों के बावजूद, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया था कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेगा। भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदा, जिससे उसे अपनी बड़ी आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली।
ईरानी मंत्री के इस बयान ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या अमेरिका वास्तव में उन देशों की 'मदद' चाहता है जो रूसी तेल खरीदकर वैश्विक आपूर्ति को बनाए रखते हैं, भले ही उसने पहले ऐसा करने वालों को दंडित करने की कोशिश की हो। इस पूरे घटनाक्रम का भू-राजनीतिक और आर्थिक संदर्भ में क्या मतलब है, यह देखना दिलचस्प होगा।
ईरान का अपना अनुभव और वाशिंगटन पर हमला
ईरान खुद दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, खासकर उसके तेल निर्यात पर। ऐसे में, तेहरान के लिए अमेरिका की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करना एक 'मैंने तो पहले ही कहा था' जैसा पल हो सकता है। ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी नीतियों को अस्थिर और विरोधाभासी करार दिया है।
यह बयान ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब वैश्विक मंच पर कई देश एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की बात कर रहे हैं, जहां पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दी जा रही है। ईरान के इस दावे से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नए समीकरण और बहस छिड़ सकती है।
FAQ
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने यह दावा कब और कहां किया?
ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया है, हालांकि सटीक तारीख और समय की जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह हालिया घटनाक्रम है।
अमेरिका ने पहले रूस से तेल खरीदने पर क्या प्रतिबंध लगाए थे?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें रूसी तेल आयात पर सीधे प्रतिबंध और रूसी समुद्री तेल पर मूल्य सीमा (price cap) लगाना शामिल था, ताकि रूस के राजस्व को कम किया जा सके।
इस पूरे मामले पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं क्या होंगी, इस पर हमारी नज़र बनी हुई है। अधिक विस्तृत समाचार कवरेज के लिए, Vews.in पर आते रहें।
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