ईरानी क्रांति: 1979 में अयातुल्लाह खुमैनी की वापसी और शाह का अंत
1 फरवरी 1979 को अयातुल्लाह खुमैनी की ईरान वापसी ने शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासन के अंत और ईरानी क्रांति की जीत की मुहर लगा दी। शाह के 'व्हाइट रिवोल्यूशन' की असफलताओं और SAVAK के दमन ने जनता में भारी असंतोष पैदा किया। 14 साल के निर्वासन में खुमैनी ने कैसेट टेपों के ज़रिए क्रांति की लौ जलाई। शाह के पलायन के बाद, खुमैनी ने ईरान को एक इस्लामी गणराज्य घोषित किया, जिसने देश के इतिहास और राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया।
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1 फरवरी 1979 को, अयातुल्लाह रुहुल्लाह खुमैनी 14 साल के निर्वासन के बाद तेहरान लौटे। एयर फ़्रांस के उनके विमान ने जैसे ही ईरानी धरती को छुआ, लाखों लोगों की भीड़ ने उनका स्वागत किया। यह सिर्फ एक नेता की वापसी नहीं थी, बल्कि ईरानी क्रांति की ऐतिहासिक जीत का क्षण था, जिसने शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासन का अंत कर दिया।
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