बहराइच हिंसा: बहराइच में दंगाइयों ने मुस्लिमों को भारी नुकसान पहुंचाया, बकरियां और सामान लूटे | पढ़ें The Wire की रिपोर्ट
बहराइच में साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान मुस्लिम समुदाय पर हमलों की घटनाएँ, जिसमें दंगाइयों ने संपत्तियों को लूटने और नष्ट करने की शिकायतें की हैं।
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उत्तर प्रदेश के बहराइच में हाल ही में हुई साम्प्रदायिक हिंसा ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ जघन्य अपराधों की एक श्रृंखला को उजागर किया है। घटनाएं तब शुरू हुईं जब एक हिंदू युवक, राम गोपाल मिश्रा, की गोली लगने से मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, दंगाइयों ने मुस्लिमों की संपत्तियों को लूटने और नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह सब 13 अक्टूबर को उस समय शुरू हुआ जब दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान माहौल बिगड़ गया।
दंगे की पृष्ठभूमि
महसी इलाके में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने जोर से बजने वाले संगीत पर आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। इस विवाद के बाद, कुछ स्थानीय मुस्लिमों पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने जुलूस पर पत्थर फेंके। इसके बाद, यह स्थिति तेजी से भड़की और दंगाइयों ने मुस्लिमों के घरों, दुकानों, और अन्य संपत्तियों पर हमले शुरू कर दिए।
“हमें हमारे पैसे, सामान और यहां तक कि हमारी बकरियों को भी नहीं छोड़ा गया,” - प्रभावित समुदाय के सदस्यों की शिकायतें।
मिश्रा की हत्या और उसके बाद की घटनाएँ
राम गोपाल मिश्रा की हत्या के बाद, उपद्रवियों ने मुस्लिमों पर हमले तेज कर दिए। उन्होंने मुस्लिम घरों में घुसकर तोड़फोड़ की, दुकानों को लूटा, और कई बकरियों को भी चुरा लिया। इस दौरान, दंगाई लाठियों, लोहे की छड़ों, और अन्य धारदार वस्तुओं से लैस थे।
पुलिस की कार्रवाई
बहराइच पुलिस ने इस मामले में 14 एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें से कई मुस्लिमों के खिलाफ हैं। पुलिस ने कहा कि उपद्रवियों के कारण “अराजकता और आतंक” का माहौल बन गया। इनमें से पांच एफआईआर उन पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज की गईं जिन्होंने मुस्लिमों पर हमलों के लिए जिम्मेदार उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई की।
उपद्रवियों के खिलाफ शिकायतें
- कादरुना ने अपनी शिकायत में कहा कि भीड़ ने उनके घर में तोड़फोड़ की और “महत्वपूर्ण सामान” को आग लगा दी।
- बेगमा ने बताया कि भीड़ ने उनके परिवार पर हमला किया, उनके सामान को जलाया, और दो बकरियों के साथ एक गैस सिलेंडर भी लूट लिया।
- शरीफ-उन-निसा ने कहा कि उनकी संपत्तियों को जला दिया गया और उनके परिवार के सदस्यों पर हमला किया गया।
प्रशासन की लापरवाही
यह भी देखने में आया है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह घटना घटित हुई। कई स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। यह भी बताया गया कि उच्च अधिकारी लखनऊ से बहराइच पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
“यह पूरी तरह से राजनीतिक है,” - एक स्थानीय व्यक्ति ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा।
बहराइच में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हुए इस हिंसक हमले ने सवाल उठाए हैं कि क्या प्रशासन सभी समुदायों के लिए समान रूप से सुरक्षा प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, यह स्पष्ट है कि इस प्रकार की साम्प्रदायिक हिंसा समाज में गहरी विभाजन का कारण बन सकती है। हमें सभी समुदायों के बीच आपसी सहिष्णुता और भाईचारे को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
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