बंगाल में वामपंथ का पतन: 'पहले राम, फिर बाम' सिर्फ़ एक परिणाम था, कारण नहीं

बंगाल में वामपंथ के पतन का गहन विश्लेषण। 'पहले राम, फिर बाम' का नारा कैसे बदलते राजनीतिक परिदृश्य का परिणाम था, न कि मूल कारण।

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Tuesday, June 2, 2026
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बंगाल में वामपंथ का पतन: 'पहले राम, फिर बाम' सिर्फ़ एक परिणाम था, कारण नहीं
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02 June 2026
बंगाल में वामपंथ का पतन: 'पहले राम, फिर बाम' सिर्फ़ एक परिणाम था, कारण नहीं
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Key Highlights

  • वामपंथ का पतन दशकों की राजनीतिक विफलता और जनाधार खोने का परिणाम था।
  • 'पहले राम, फिर बाम' का नारा भाजपा के उभार को दर्शाता है, लेकिन यह वामपंथ के कमजोर होने के बाद आया।
  • तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआती शून्य भरा, बाद में भाजपा ने अपनी जगह बनाई।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक आम कहावत 'पहले राम, फिर बाम' अक्सर सुनाई देती है। यह कथन अक्सर वामपंथ के ऐतिहासिक पतन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बढ़ते प्रभाव की ओर इशारा करता है। हालांकि, गंभीर राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह नारा वामपंथ के विघटन का कारण नहीं, बल्कि एक गहरा परिणाम था। राज्य में वामपंथी मोर्चे का तीन दशकों से अधिक का शासन अपनी ही कमजोरियों के बोझ तले दब गया, जिससे एक राजनीतिक शून्य पैदा हुआ जिसे पहले तृणमूल कांग्रेस और फिर भाजपा ने भरा।

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