बहराइच जेठ मेला 2025: नहीं लगेगा मेला हाईकोर्ट ने मेले पर रोक में दखल से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बहराइच जेठ मेले पर जिला प्रशासन की रोक में हस्तक्षेप से इनकार किया। सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह पर श्रद्धालुओं को नियमित अनुष्ठानों में शामिल होने की अनुमति मिली।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शनिवार को बहराइच जेठ मेला पर जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई रोक के मामले में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह जिलाधिकारी के मेले पर रोक के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। हालांकि, सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर नियमित धार्मिक अनुष्ठानों और प्रथाओं को जारी रखने की अनुमति दी गई है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिली है।
न्यायमूर्ति ए आर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की विशेष खंडपीठ ने यह आदेश बहराइच दरगाह शरीफ प्रबंध समिति और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दरगाह प्रबंध समिति के सहयोग से कानून व्यवस्था बनाए रखे और श्रद्धालुओं के लिए पानी, शौचालय, और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करे। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि मेले की सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रशासन की रोक बरकरार रहेगी।
यह मामला तब गरमाया जब बहराइच के जिलाधिकारी ने 26 अप्रैल 2025 को एक आदेश जारी कर जेठ मेले के आयोजन पर रोक लगा दी थी। यह मेला हर साल सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह के पास आयोजित होता है और इसमें लाखों श्रद्धालु व व्यापारी भाग लेते हैं। प्रशासन ने स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) और खुफिया विभाग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह रोक लगाई थी, जिसमें भीड़ के कारण संभावित अशांति की आशंका जताई गई थी।
"जिला प्रशासन के जेठ मेले पर रोक के निर्णय में हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हालांकि, दरगाह शरीफ पर नियमित धार्मिक अनुष्ठान और प्रथाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।" - इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ पीठ
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की मुख्य बातें
- बहराइच जेठ मेले की सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर जिला प्रशासन की रोक बरकरार रहेगी।
- दरगाह शरीफ में नियमित धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति, जिसमें श्रद्धालु शामिल हो सकेंगे।
- राज्य सरकार को कानून व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक जनसुविधाएं प्रदान करने का निर्देश।
- दरगाह प्रबंध समिति को सीमित संख्या में श्रद्धालुओं के प्रवेश को सुनिश्चित करने का आदेश।
- कोर्ट ने मेले से जुड़े किसी भी संभावित हादसे या अशांति को रोकने के लिए सख्ती बरतने को कहा।
याचिका और कोर्ट में बहस
बहराइच दरगाह शरीफ प्रबंध समिति के चेयरमैन सहित छह लोगों और दो अन्य जनहित याचिकाओं ने जिलाधिकारी के 26 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डॉ. एल पी मिश्र ने तर्क दिया कि जेठ मेला एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे रद्द करना कानून की मंशा के खिलाफ है। उन्होंने मेले को नियंत्रित ढंग से आयोजित करने की अनुमति देने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं और व्यापारियों को नुकसान न हो।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि मेले पर रोक का फैसला खुफिया विभाग की रिपोर्टों पर आधारित है, जो सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। सिंह ने कहा कि भीड़ प्रबंधन और कानून व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन का फैसला उचित है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम आदेश जारी किया और अंतिम फैसले को सुरक्षित रखा।
मेले का महत्व और भविष्य
बहराइच जेठ मेला उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने और बड़े धार्मिक मेलों में से एक है, जो सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। मेले में हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं, जो उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं।
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से जहां श्रद्धालुओं को दरगाह शरीफ में पूजा-अर्चना की अनुमति मिली है, वहीं मेले की सांस्कृतिक गतिविधियों पर रोक ने कई व्यापारियों और आयोजकों को निराश किया है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि दरगाह में सीमित श्रद्धालुओं की उपस्थिति से किसी भी तरह की अशांति या हादसे की आशंका को टाला जाए। इस मामले में अंतिम फैसला अभी बाकी है, जो मेले के भविष्य को और स्पष्ट करेगा।
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