फखरपुर में 13 दिसंबर को सजेगा अज़ीम-उश्शान कुल हिंद मुशायरा, देशभर के नामचीन शायर करेंगे शिरकत
बहराइच जिले के फखरपुर में 13 दिसंबर 2025 को आयोजित होने जा रहा अज़ीम-उश्शान कुल हिंद मुशायरा व कवि सम्मेलन (जश्न-ए-फखरपुर) एक भव्य साहित्यिक आयोजन है। यह कार्यक्रम फखरपुर थाने के सामने आयोजित होगा, जिसमें देशभर के नामचीन शायर और कवि शिरकत करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य उर्दू-हिंदी अदब को बढ़ावा देना, सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना और साहित्य प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
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बहराइच, उत्तर प्रदेश: जिले के फखरपुर कस्बे से साहित्य और संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और उत्साहजनक खबर सामने आई है। फखरपुर एक बार फिर देश की अदबी (साहित्यिक) राजधानी बनने को तैयार है, जहाँ आगामी 13 दिसंबर 2025, दिन शनिवार को एक भव्य **कुल हिंद मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह को 'जश्न-ए-फखरपुर' नाम दिया गया है, जो बहराइच जिले के थाने के सामने स्थित मुख्य मैदान में आयोजित होगा। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से लगभग **12 से अधिक जाने-माने शायर और कवि** शिरकत करेंगे, जो अपनी बेजोड़ शायरी, नज़्मों और काव्य पाठ से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखेंगे।
📅 कार्यक्रम विवरण और स्थानीय महत्व
यह आयोजन न सिर्फ़ कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि यह फखरपुर की **सांस्कृतिक विरासत** को भी दर्शाता है, जहाँ उर्दू और हिंदी अदब का संगम देखने को मिलता है। कार्यक्रम का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
| आयोजन का नाम | **कुल हिंद मुशायरा व कवि सम्मेलन 'जश्न-ए-फखरपुर'** |
|---|---|
| तारीख और दिन | 13 दिसंबर 2025, दिन: शनिवार |
| मुकाम (स्थल) | थाने के सामने, फखरपुर-बहराइच |
👑 आयोजन के मुख्य स्तंभ और स्थानीय नेतृत्व
इस महान साहित्यिक जलसे को सफल बनाने का श्रेय आयोजन समिति के समर्पित सदस्यों को जाता है। स्थानीय नेतृत्व और अदबी हस्तियों की महत्वपूर्ण भागीदारी कार्यक्रम की भव्यता सुनिश्चित करती है। प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
- मुशायरा सदर (अध्यक्ष): रज़ीउद्दीन 'बनारसी', जिनकी देखरेख में यह महफ़िल सजेगी।
- अध्यक्षता: वसी अहमद 'ठेकेदार', जो कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे।
- मेहमान-ए-खुसूसी (विशिष्ट अतिथि): विश्व प्रकाश सिंह 'यश'।
- संरक्षक एवं आयोजक: अमन अवस्थी 'गोलू', जिनकी सक्रिय भूमिका और उत्साह से यह आयोजन संभव हो पाया है।
- संपर्क सूत्र (ऑर्गेनाइज़र टीम): हन्नान खान, मिर्ज़ा शहज़ाद रहमान, और इक़्तेदार अहमद, जो ज़मीनी स्तर पर व्यवस्थाएँ संभाल रहे हैं।
"फखरपुर का 'जश्न-ए-फखरपुर' अब एक वार्षिक परंपरा बन चुका है, जो आपसी मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देता है। यह मंच समाज को जोड़ने और उत्कृष्ट शायरी को सम्मान देने का माध्यम है।" – अमन अवस्थी 'गोलू', आयोजक।
📝 मुशायरे और कवि सम्मेलन: सांस्कृतिक संवाद का मंच
मुशायरा और कवि सम्मेलन केवल कविता पाठ तक ही सीमित नहीं होते, बल्कि ये भारतीय संस्कृति की अद्वितीय साहित्यिक परंपरा का सशक्त हिस्सा हैं। 'जश्न-ए-फखरपुर' जैसे आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों से आए विचारों को एक मंच पर लाते हैं।
- सामाजिक चेतना: शायर और कवि सामयिक मुद्दों और सामाजिक विसंगतियों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं, जिससे श्रोताओं में जागरूकता फैलती है।
- भाषा का संगम: यह हिंदी और उर्दू, दोनों भाषाओं की मिठास और गहराई को एक साथ प्रस्तुत करता है, जिससे भाषाई और सांस्कृतिक सौहार्द को बल मिलता है।
- युवा प्रतिभा को प्रोत्साहन: नए और स्थानीय युवा कवियों को स्थापित राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ मंच साझा करने का अमूल्य अवसर मिलता है, जो उनकी साहित्यिक यात्रा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
- राष्ट्रीय एकता: विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के कलाकारों की उपस्थिति राष्ट्रीय एकता और विभिन्नता में एकता की भावना को मजबूत करती है।
🎤 अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के शायरों की सूची
इस मुशायरे में शिरकत करने वाले 12 नामचीन शायरों और कवियों की सूची उनके साहित्यिक कद और कला की विविधता को दर्शाती है। श्रोताओं को ग़ज़ल, नज़्म, हास्य और सामाजिक शायरी के उत्कृष्ट उदाहरण सुनने को मिलेंगे:
- अब्बास काशिफ (कुवैत-निज़ामत): अपनी बेहतरीन निज़ामत (संचालन) और संजीदा शायरी के लिए विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं।
- महशर आफ़रीदी: अपनी ताज़ातरीन नज़्मों के साथ।
- अज़्म शाकरी: एक दमदार और असरदार आवाज़।
- हाशिम फ़िरोज़ाबादी: मुल्क के सबसे पसंदीदा ग़ज़ल गो शायरों में से एक, जो प्रेम और विरह को अपनी शायरी में पिरोते हैं।
- आसिफ़ सेफी: अपनी अनूठी शैली के लिए जाने जाते हैं।
- स्वयं श्रीवास्तव: युवा और ऊर्जावान कवि।
- सर्वेश अस्थाना (हास्य कवि): अपने हास्य व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाएंगे और समाज की कड़वी सच्चाइयों को हास्य के पर्दे में पेश करेंगे।
- वसीम रामपुरी (कव्वाल-ओ-मुशायरा): कव्वाली और शायरी का अद्भुत और दिलकश मिश्रण।
- सज्जाद झंझट: जिनका नाम ही उनकी हास्य शैली का परिचय देता है।
- आफ़ाक़ अञ्जुम: जिनकी शायरी में सामाजिक चेतना मुखर होती है।
- सबा बलरामपुरी: महिला शायरों में एक सशक्त हस्ताक्षर, अपनी ताज़ातरीन नज़्मों और बेहतरीन अंदाज़ के लिए चर्चित।
- हिमांशी बावरा: नई पीढ़ी की प्रतिनिधि।
मुशायरे का संचालन एक पेशेवर निज़ामत की देखरेख में होगा, जिससे देर रात तक श्रोताओं का उत्साह बना रहेगा।
🛡️ सुरक्षा, व्यवस्था और अपील
मुशायरा कमेटी फखरपुर इस आयोजन को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार** बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। थाने के सामने आयोजन होने के कारण प्रशासनिक सुरक्षा पहले से ही सुनिश्चित है।
- बैठक और सुविधा: श्रोताओं की सुविधा के लिए महिलाओं और पुरुषों हेतु अलग-अलग बैठक व्यवस्था की गई है।
- सुरक्षा और आपातकाल: भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित वॉलंटियर्स, निजी सुरक्षा गार्ड और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा का इंतज़ाम किया गया है।
- पार्किंग: आसपास के स्थानों पर वाहनों के सुव्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि यातायात बाधित न हो।
मुशायरा कमेटी फखरपुर, ज़िला बहराइच (मिंज़ानिब) ने जिले के सभी अदब प्रेमियों और साहित्य रसिकों से अनुरोध किया है कि वे 13 दिसंबर 2025 की रात को समय पर फखरपुर थाने के सामने ज़रूर तशरीफ़ लाएं। अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर शायरी के इस महाकुंभ का हिस्सा बनें और देश के महान कलाकारों को सुनने का लाभ उठाएं।
"यह रात फखरपुर के इतिहास में अदब की सुनहरी स्याही से लिखी जाएगी। आइए, मोहब्बत और कला के इस जश्न में शामिल हों।" – इक़्तेदार अहमद, ऑर्गेनाइज़र।
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