लीक दस्तावेज़ का खुलासा: ग़ज़ा युद्ध में इज़राइल को सैन्य समर्थन देना चाहता था UAE

लीक हुए आधिकारिक दस्तावेज़ से खुलासा हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ग़ज़ा पर युद्ध के दौरान इज़राइल को रेड सी के सैन्य अड्डों से सीधे सैन्य, खुफिया और लॉजिस्टिक सहायता देने की योजना बना रहा था। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

लीक दस्तावेज़ का खुलासा: ग़ज़ा युद्ध में इज़राइल को सैन्य समर्थन देना चाहता था UAE
लीक दस्तावेज़ का खुलासा

एक लीक हुए आधिकारिक दस्तावेज़ से यह सनसनीखेज़ खुलासा हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ग़ज़ा पर इज़राइल के युद्ध के दौरान उसे सीधे सैन्य, खुफिया और लॉजिस्टिक सहायता देने की योजना बनाई थी। यह दस्तावेज़ Emirati Leaks द्वारा एक्सेस किया गया, जिसमें रेड सी (लाल सागर) स्थित UAE के सैन्य अड्डों के इस्तेमाल का प्रस्ताव सामने आया।

रेड सी के सैन्य अड्डों से सीधा समर्थन

लीक दस्तावेज़ के अनुसार, UAE सरकार ने रेड सी क्षेत्र में स्थित अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग करके इज़राइल को उसके ग़ज़ा युद्ध में सीधा सहयोग देने की योजना बनाई थी। इसमें सैन्य उपकरण, खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल था।

दस्तावेज़ में यह भी बताया गया है कि यह समर्थन यमन, इरिट्रिया और सोमालिया के ज़रिए दक्षिणी रेड सी बेस से संचालित किया जाना था, जो क्षेत्र में UAE की गहरी सैन्य मौजूदगी को दर्शाता है।

हमदान बिन ज़ायद अल-नहयान का पत्र

यह पत्र अक्टूबर 2023 का है, जिसे हमदान बिन ज़ायद अल-नहयान ने लिखा था। वह UAE रेड क्रिसेंट अथॉरिटी के चेयरमैन हैं। यह पत्र UAE सशस्त्र बलों के संयुक्त संचालन कमान (Joint Operations Command) को संबोधित था।

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पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह दस्तावेज़ उन सभी तैयारियों और व्यवस्थाओं का विवरण देता है, जो “फिलिस्तीन में आतंकवादियों के खिलाफ इज़राइल के युद्ध में इज़राइल राज्य का समर्थन और उसे मजबूत करने” के लिए की गई थीं।

क़तर और कुवैत पर गंभीर आरोप

दस्तावेज़ में क़तर पर हमास को समर्थन देने का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया कि:

“इस समर्थन ने क़तर और विरोधी पक्षों के बीच समस्याएं और टकराव पैदा करने में योगदान दिया है।”

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में कुवैत को भी “हमारे प्रति शत्रुतापूर्ण पक्षों” में शामिल करने की बात कही गई है।

दस्तावेज़ के अनुसार, जांच में पाया गया कि कुवैत ने फिलिस्तीन में सक्रिय उग्रवादी समूहों को “भारी वित्तीय सहायता” प्रदान की, जो UAE और कुवैत के बीच हुए समझौतों का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया।

इज़राइल की मदद को बताया ‘नैतिक दायित्व’

रिपोर्ट में कहा गया:

“इज़राइल राज्य के साथ हमारे पूर्व संबंधों का उल्लेख आवश्यक है, जो हमें संकट और समृद्धि—दोनों समय—में उनके साथ सहयोग और सहायता करने के लिए बाध्य करते हैं।”

इन संबंधों को वर्ष 2020 के बाद और अधिक “तेज़ और मजबूत” बताया गया है।

सैन्य तकनीक और खुफिया सहयोग

दस्तावेज़ में दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी रणनीति, सैन्य तकनीक और खुफिया क्षेत्र में “क़रीबी, एकजुट और एकीकृत” सहयोग पर ज़ोर दिया गया है।

इसमें यह भी पुष्टि की गई है कि UAE ने इज़राइल को एक अरब डॉलर मूल्य के खुफिया उपकरण और डिवाइस प्रदान किए।

अब्राहम समझौते और संबंधों का विस्तार

UAE ने वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से अब्राहम समझौते के तहत इज़राइल के साथ अपने राजनयिक संबंध सामान्य किए थे।

इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध तेज़ी से बढ़े—राजदूतों का आदान-प्रदान हुआ और हाल ही में UAE ने इज़राइल में स्थायी दूतावास बनाने के लिए ज़मीन भी खरीदी। यह पहली बार था जब किसी अरब देश ने इज़राइल के भीतर राजनयिक सुविधा के लिए ज़मीन खरीदी।

ग़ज़ा युद्ध के बाद व्यापार और सैन्य रिश्ते

ग़ज़ा युद्ध शुरू होने के बाद से, अबू धाबी इज़राइल का सबसे बड़ा अरब व्यापारिक साझेदार बन गया है। साथ ही, तेल अवीव के साथ उसका रणनीतिक सैन्य सहयोग भी लगातार गहरा होता गया।

Elbit Systems डील में भी UAE का नाम

एक फ्रांसीसी रिपोर्ट के अनुसार, UAE को USD 2.3 बिलियन की एक बड़ी डील के पीछे “रहस्यमय ग्राहक” माना जा रहा है। यह डील इज़राइल की सैन्य तकनीक कंपनी Elbit Systems के साथ हुई थी।

इस दावे की पुष्टि इज़राइली मीडिया रिपोर्टों में भी देखने को मिली, जिससे UAE और इज़राइल के बीच गहरे सैन्य-औद्योगिक संबंधों पर और सवाल खड़े हो गए हैं।

लीक हुए इस दस्तावेज़ ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। ग़ज़ा युद्ध के दौरान UAE की कथित भूमिका, इज़राइल को सैन्य समर्थन, और क़तर-कुवैत पर लगाए गए आरोप— इन सभी ने क्षेत्रीय संतुलन और अरब एकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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Furkan S Khan Verified Media or Organization • 05 Aug, 2014

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2013 से खाड़ी देशों में बसे भारतीयों की ज़िंदगी से पर्दा उठा रहे हैं। प्रवासियों की आवाज़ बेखौफ़ उठाते हैं। हमारे साथ जुड़ें, सच्ची ख़बरों के लिए।