सऊदी में फांसी से बचा भारतीय युवक: जैद जुनैद की सजा 15 साल की कैद में बदली

सऊदी अरब मक्का में फंसी की सजा पाने वाले जैद जुनैद की सजा को फंसी से हटा के 15 साल की कैद में तब्दील किया गया। जानिए पूरा मामला और सऊदी में श्रम मामलों की स्थिति।

Saturday, December 28, 2024
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सऊदी में फांसी से बचा भारतीय युवक: जैद जुनैद की सजा 15 साल की कैद में बदली
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28 December 2024
सऊदी में फांसी से बचा भारतीय युवक: जैद जुनैद की सजा 15 साल की कैद में बदली
जैद जुनैद की सजा 15 साल की कैद में बदली

सऊदी अरब में मक्का की एक अदालत ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी जैद जुनैद को ड्रग तस्करी के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। जैद पर आरोप था कि वह मक्का में अवैध रूप से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था। हालाँकि, भारतीय वाणिज्य दूतावास और परिवार के निरंतर प्रयासों के बाद, सऊदी अधिकारियों ने उनकी सजा को कम करके 15 साल की कैद में बदल दिया है।

क्या था पूरा मामला?

  • स्थान: मक्का, सऊदी अरब
  • आरोप: ड्रग तस्करी
  • मूल सजा: फांसी
  • नई सजा: 15 साल की कैद
  • जेल: जेद्दा जेल

22 दिन पहले, मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विपिन ताड़ा को सऊदी अरब के भारतीय वाणिज्य दूतावास से एक पत्र मिला था, जिसमें जैद की फांसी की सजा की सूचना दी गई थी। परिवार ने तुरंत हस्तक्षेप की मांग की और दया याचिका दायर की।

सऊदी में श्रम मामलों का हाल

सऊदी अरब में श्रम अदालतों ने हाल के वर्षों में तेजी से मामलों का निपटारा किया है। 2024 की चौथी तिमाही में, रियाद में सबसे अधिक श्रम मामलों का समाधान हुआ। मक्का इस सूची में दूसरे स्थान पर रहा।

"रियाद में 10,644 मामलों का समाधान हुआ, जबकि मक्का में 9,820 और पूर्वी प्रांत में 5,449 मामले निपटाए गए।"

विशेषज्ञों के अनुसार, विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान और श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों के कारण श्रम मामलों में गिरावट आई है। श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए श्रम अदालतें तेजी से काम कर रही हैं।

न्यायिक प्रक्रिया और श्रमिक अधिकार

सऊदी अरब में श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए 2018 में नई श्रम अदालतें स्थापित की गईं। इन अदालतों का उद्देश्य श्रमिक और नियोक्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखना है।

यदि किसी मामले में समझौता नहीं होता है, तो 21 दिनों के भीतर मामला श्रम अदालत में भेज दिया जाता है। यह प्रक्रिया श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और न्याय में देरी को रोकने के लिए की गई है।