सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद CJP संस्थापक दिपके भूख हड़ताल पर, दिल्ली में बढ़ा विरोध
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली में भूख हड़ताल शुरू की। जानें क्या है पूरा मामला।
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Key Highlights
- CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
- यह कदम सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद उठाया गया।
- दिपके ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'जबरन' और 'घसीटकर' ले जाने का आरोप लगाया।
दिल्ली में प्रदर्शन: वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद दिपके ने संभाली कमान
दिल्ली में विरोध का स्वर एक बार फिर तेज हो गया है। CJP (Citizen's for Justice and Peace) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका यह ऐलान पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा 'जबरन' अस्पताल ले जाए जाने के बाद आया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि वे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक लद्दाख की मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
वांगचुक का प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
सोनम वांगचुक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा, खासकर छठी अनुसूची को लागू करने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे। पिछले कई दिनों से वे अपने साथियों के साथ इस मांग को लेकर मुखर थे। अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि सोनम वांगचुक को शुक्रवार सुबह पुलिसकर्मी घसीटते हुए अस्पताल ले गए। उनके अनुसार, पुलिस ने इस दौरान कथित तौर पर अपशब्दों का भी प्रयोग किया। दिपके ने यहां तक कहा कि "ये पुलिस नहीं, आरएसएस के गुंडे थे।" हालांकि, पुलिस की तरफ से इन गंभीर दावों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अभिजीत दिपके का संकल्प: मांगों की पूर्ति तक जारी रहेगी हड़ताल
अभिजीत दिपके का कहना है कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद, उन्हें वहां से भी हटा दिया गया। अब दिपके ने वांगचुक की मांगों को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। उनका संकल्प है कि जब तक लद्दाख से जुड़ी उनकी संवैधानिक मांगें पूरी नहीं होंगी या उन्हें भी जबरन हटाया नहीं जाएगा, वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो इस मुद्दे पर व्यापक जन समर्थन का संकेत देता है।
लद्दाख की मांगें और राष्ट्रीय बहस
लद्दाख में पर्यावरण और जनजातीय अधिकारों के संरक्षण की मांग लंबे समय से उठ रही है। सोनम वांगचुक जैसे कई कार्यकर्ता और स्थानीय लोग हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि अनियंत्रित औद्योगीकरण और विकास इस क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा है। लद्दाख के लोग अपनी पहचान और भूमि की सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची के तहत विशेष प्रावधानों की मांग कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लद्दाख के मुद्दे पर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। दिपके की भूख हड़ताल ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में बनाए रखा है। प्रदर्शनकारी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और उनकी मांगों पर गंभीरता से गौर करने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि इस हिमालयी क्षेत्र के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
इस पूरे मामले पर अधिक विस्तृत समाचार कवरेज के लिए Vews.in पर बने रहें।
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