लिंचिंग के शिकार साबिर की पत्नी की नौकरी गई, ममता सरकार ने दी थी नियुक्ति, अब नई सरकार ने रद्द की
लिंचिंग के शिकार साबिर की पत्नी को ममता सरकार ने सहानुभूति के आधार पर नौकरी दी थी। अब नई सरकार आने के बाद उनकी नौकरी रद्द कर दी गई है।
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Key Highlights
- लिंचिंग के शिकार साबिर की पत्नी की सरकारी नौकरी रद्द की गई।
- ममता बनर्जी सरकार ने सहानुभूति के आधार पर दी थी यह नियुक्ति।
- नई सरकार के सत्ता में आने के बाद यह फैसला लिया गया।
पश्चिम बंगाल में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल सामने आया है, जहां लिंचिंग के शिकार साबिर की पत्नी को पिछली ममता बनर्जी सरकार द्वारा दी गई नौकरी अब रद्द कर दी गई है। यह खबर सामने आते ही पीड़ित परिवार में हड़कंप मच गया है, जो पहले ही एक त्रासदी से गुजर रहा था।
ममता सरकार का सहानुभूतिपूर्ण कदम
जानकारी के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व हुए एक लिंचिंग मामले में साबिर की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने तब पूरे राज्य में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। साबिर के निधन के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए साबिर की पत्नी को सहानुभूति के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की थी। यह कदम परिवार को आर्थिक सहारा देने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक कोशिश मानी जा रही थी। नौकरी मिलने के बाद परिवार को कुछ हद तक राहत मिली थी।
नई सरकार में चली गई नौकरी, प्रशासनिक समीक्षा का हवाला
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पिछली सरकार द्वारा की गई कई नियुक्तियों की समीक्षा की जा रही थी। इसी क्रम में साबिर की पत्नी की नौकरी पर भी तलवार लटकी। सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार ने ‘प्रशासनिक प्रक्रियाओं’ और ‘नियुक्ति नियमों’ की समीक्षा का हवाला देते हुए इस नियुक्ति को रद्द कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, इस फैसले से परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
परिवार पर फिर संकट के बादल
नौकरी रद्द होने के बाद साबिर की पत्नी और उनके बच्चों के सामने फिर से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परिवार का कहना है कि यह फैसला उनके लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उनका तर्क है कि यह नियुक्ति सहानुभूति के आधार पर की गई थी, न कि किसी गलत प्रक्रिया के तहत। यह मामला अब राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
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