असम BJP AI वीडियो विवाद: डॉ. फैजुल हसन खान ने NHRC में हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ शिकायत दर्ज की | पॉइंट ब्लैंक शॉट पर बवाल
असम BJP द्वारा शेयर किया गया AI जनरेटेड वीडियो जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मुसलमानों पर 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' करते दिखे। डॉ. फैजुल हसन खान ने NHRC में शिकायत दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। वीडियो डिलीट होने के बाद भी विवाद जारी।
असम की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर 7 फरवरी को शेयर किया गया एक AI जनरेटेड वीडियो अब पूरे देश में तीखे विवाद का कारण बन गया है। इस वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को दो मुस्लिम व्यक्तियों (स्कल कैप और दाढ़ी वाली तस्वीरों) पर "पॉइंट ब्लैंक शॉट" करते दिखाया गया था। कैप्शन में "No Mercy" और "Point Blank Shot" जैसे भड़काऊ शब्द लिखे थे।
डॉ. फैजुल हसन खान की NHRC में शिकायत
प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता और इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक राइट्स फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. फैजुल हसन खान (@FaizulHasanKhan) ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में औपचारिक शिकायत दर्ज की है। अपनी शिकायत में उन्होंने लिखा है:
डॉ. खान ने पहले भी दो शिकायतें NHRC को भेजी थीं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वे नाराज हैं और सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी साझा कर रहे हैं।
Complaint to @India_NHRC for Seeking Immediate Action Regarding Hate-Promoting Video shared by @BJP4Assam pic.twitter.com/5C6WbiOlmz — Dr. Faizul Hasan (@FaizulHasanKhan) February 7, 2026
वीडियो क्या था और क्यों वायरल हुआ?
वीडियो में असली फुटेज को AI से तैयार इमेज के साथ मिलाकर दिखाया गया। इसमें CM सरमा को राइफल चलाते हुए और फिर मुस्लिम पहचान वाली तस्वीरों पर गोली चलती दिखाई गई। कुछ हिस्सों में "विदेशी मुक्त असम" जैसे संदेश भी थे।
कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों ने इसे "खुला नरसंहार का आह्वान" बताया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और के.सी. वेणुगोपाल ने सख्त कार्रवाई की मांग की। भारी विरोध के बाद BJP ने वीडियो डिलीट कर दिया, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ डैमेज कंट्रोल है, न कि जिम्मेदारी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
असम में लगभग 40% मुस्लिम आबादी है और राज्य में अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से गर्म है। BJP इसे चुनावी मुद्दा बनाती रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि AI टेक्नोलॉजी का इस तरह इस्तेमाल नफरत और हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
NHRC से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कई मानवाधिकार संगठन और कार्यकर्ता इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। डॉ. फैजुल हसन खान की शिकायत ने इस विवाद को नया आयाम दिया है।
यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक कंटेंट कितना संवेदनशील हो सकता है। AI के दौर में फेक वीडियो और हेट स्पीच को रोकने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है। अधिक अपडेट के लिए जुड़े रहें।