असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL: हेट स्पीच और विवादास्पद वीडियो पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के कथित हेट स्पीच और AI जनरेटेड शूटिंग वीडियो पर याचिका पर तत्काल सुनवाई का फैसला किया है। CJI सूर्यकांत ने चुनावी समय में अदालतों में राजनीतिक लड़ाई पर टिप्पणी की।

Furkan S Khan
Furkan S Khan Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 मुख्य संपादक
फ़रवरी 10, 2026 • 3:05 PM | नई दिल्ली  13  0
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असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL: हेट स्पीच और विवादास्पद वीडियो पर सुनवाई
असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के हालिया विवादास्पद बयानों और एक AI जनरेटेड वीडियो को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा राजनीतिक मामला पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की मांग पर इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

क्या है पूरा विवाद?

सीपीआई(एम) और सीपीआई नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री सरमा ने "मिया" मुस्लिम समुदाय (बंगाली मूल के मुस्लिम) के खिलाफ नफरत भड़काने वाले बयान दिए हैं। एक वायरल वीडियो में उन्हें राइफल से निशाना साधते हुए दिखाया गया है, जिसे असम भाजपा इकाई ने शेयर किया था और बाद में हटा लिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह वीडियो और बयान संविधान के मूल्यों का उल्लंघन करते हैं और साम्प्रदायिक सौहार्द को खतरे में डालते हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी: "राजनीतिक लड़ाइयाँ अक्सर अदालतों में लड़ाई जाती हैं, खासकर चुनाव के समय।" इस टिप्पणी से साफ है कि कोर्ट इस मामले को चुनावी संदर्भ में भी देख रहा है, क्योंकि असम में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं।

याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें

  • मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का निर्देश
  • संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा हेट स्पीच रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करना
  • "मिया", "लव जिहाद" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग

इसके अलावा, पूर्व दिल्ली एलजी नजीब जंग समेत 12 प्रमुख नागरिकों ने भी अलग PIL दायर की है, जिसमें सरमा सहित अन्य नेताओं के बयानों को "संवैधानिक मर्यादा के विरुद्ध" बताया गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

असम में मुस्लिम आबादी राज्य की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई है। मुख्यमंत्री सरमा पर पिछले कुछ वर्षों से बंगाली मूल के मुस्लिमों को "घुसपैठिए" करार देने और उनके खिलाफ आर्थिक-सामाजिक बहिष्कार की बात करने के आरोप लगते रहे हैं। यह मामला 2026 के असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आया है, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल असम की राजनीति बल्कि पूरे देश में हेट स्पीच और चुनावी भाषणों की सीमा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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