हर एक लम्हा है दिल में सवाल सा | फुरकान एस खान की शायरी

यह ग़ज़ल Furkan S Khan की है जिसमें हर शेर 'सा' रदीफ़ और 'आल' क़ाफ़िया पर आधारित है। इश्क़, ख्याल और जज़्बात के रंगों में डूबी यह शायरी दिल को छू लेने वाली है।

Furkan S Khan
Furkan S Khan Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 मुख्य संपादक
अगस्त 28, 2025 • 3:01 PM | फखरपुर  16  1
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हर एक लम्हा है दिल में सवाल सा | फुरकान एस खान की शायरी

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Furkan S Khan
हर एक लम्हा है दिल में सवाल सा, तेरा ख़याल है ज्यों कोई ख़याल सा।
फुरकान एस खान
मुसाफ़िर-ए-दिल को राहें न मिल सकीं, तेरी तरफ़ है खिंचाव का जाल सा।
फुरकान एस खान
हवा के संग चला हूँ तेरे निशाँ ढूँढता, लगे है रस्ता भी तेरा ख्याल सा।
फुरकान एस खान
निगाह में जो ठहरती है तेरी सूरत, वो चाँदनी है या कोई गुलाल सा।
फुरकान एस खान
तेरे बिना है अँधेरों में डूबता दिल, तेरे साथ रोशन हर इक जमाल सा।
फुरकान एस खान
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हर एक लम्हा है दिल में सवाल सा, 
तेरा ख़याल है ज्यों कोई ख़याल सा। 

मुसाफ़िर-ए-दिल को राहें न मिल सकीं, 
तेरी तरफ़ है खिंचाव का जाल सा। 

हवा के संग चला हूँ तेरे निशाँ ढूँढता, 
लगे है रस्ता भी तेरा ख्याल सा। 

निगाह में जो ठहरती है तेरी सूरत, 
वो चाँदनी है या कोई गुलाल सा। 

तेरे बिना है अँधेरों में डूबता दिल, 
तेरे साथ रोशन हर इक जमाल सा।

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2013 से खाड़ी देशों में बसे भारतीयों की ज़िंदगी से पर्दा उठा रहे हैं। प्रवासियों की आवाज़ बेखौफ़ उठाते हैं। हमारे साथ जुड़ें, सच्ची ख़बरों के लिए।

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