इस्लाम अमन का मज़हब है

तालीम और आगाही (Education and Awareness) शामिलाती निसाब (Inclusive Curriculum): स्कूलों के निसाब में रवादारी, इत्तेहाद और मश्तरका तारीख़ की तालीम को शामिल किया जाए। शहरी और अख़लाक़ी तालीम (Civic & Moral Education) हमदर्दी, इज़्ज़त, और तआवुन जैसे उसूलों की तरबीयत दी जाए।

Dr. Faizul Hasan
Dr. Faizul Hasan Official | Verified Expert • 30 May, 2025 मुख्य संपादक
जून 3, 2025 • 7:01 PM | नई दिल्ली  16  0
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इस्लाम अमन का मज़हब है

साम्प्रदायिक सौहार्द और एकता को बढ़ावा देना एक पुरअमन, शामिलाती और तरक्कीपसंद समाज की बुनियाद है। इसे हासिल करने के लिए नीचे दिये गए अहम रास्तों पर अमल करना ज़रूरी है

1. तालीम और आगाही (Education and Awareness) शामिलाती निसाब (Inclusive Curriculum): स्कूलों के निसाब में रवादारी, इत्तेहाद और मश्तरका तारीख़ की तालीम को शामिल किया जाए। शहरी और अख़लाक़ी तालीम (Civic & Moral Education) हमदर्दी, इज़्ज़त, और तआवुन जैसे उसूलों की तरबीयत दी जाए। वर्कशॉप्स और सेमिनार्स: मुख्तलिफ़ मज़ाहिब और तहज़ीबों के बारे में शऊर बढ़ाने के लिए वर्कशॉप्स और सेमिनार्स कराए जाएँ।

2. मज़हबी और तहज़ीबी मक़ामलात (Interfaith & Intercultural Dialogues)

मुश्तरका बातचीत (Community Dialogues): मुख्तलिफ़ फिरकों और क़ौमों के दरमियान मुसलसल बातचीत का एहतेमाम किया जाए। तहवारों की इजतिमा'ई तक़रीबात: मुख्तलिफ़ धर्मों के त्योहारों को मिल-जुल कर मनाने की रवायत डाली जाए। मज़हबी रहनुमाओं का किरदार: इत्तेहाद और अम्न का पैग़ाम देने के लिए मज़हबी रहनुमाओं को शामिल किया जाए।

3. मीडिया और इब्लाग़ (Media & Communication) मुसबत तसव्वुर (Positive Representation)

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मीडिया में मुख्तलिफ़ क़ौमों और फिरकों की अच्छी मिसालें पेश की जाएँ। नफ़रतअंगेज़ बोल (Hate Speech) पर निगरानी: नफ़रत और तफ़रीक़ फैलाने वाली बातों की रोकथाम की जाए। इत्तेहादी मुहिम (Public Campaigns): सोशल मीडिया और टीवी पर एकता को बढ़ावा देने वाली मुहिम चलाई जाए।

4. क़ानूनी और पालिसी इक़दामात (Legal & Policy Measures)

तास्सुब के खिलाफ़ क़ानून: मज़हब या नस्ल के आधार पर होने वाले जुल्म और तास्सुब के खिलाफ़ सख़्त क़ानून लागू हों। बराबरी के मौक़े: सरकारी और इदारी सतह पर तमाम क़ौमों को बराबर नुमाइंदगी मिले। कम्युनिटी पुलिसिंग: अवाम और पुलिस के दरमियान एतबार और तआवुन को बढ़ावा दिया जाए।

5. नौजवान और अवामी सतह पर शिरकत (Youth & Grassroots Engagement)

यूथ क्लब्स और वॉलंटियरिंग: नौजवानों को अम्न और इत्तेहाद के लिए काम करने का मौका दिया जाए। सक़ाफ़ती तबादले (Cultural Exchange): मुख्तलिफ़ तहज़ीबों से ताल्लुक रखने वाले नौजवानों के दरमियान खेल, हनर और तालीम के ज़रिए मेल-जोल बढ़ाया जाए। मुकामी क़ियादत की ताक़्वियत: मुक़ामी रहनुमाओं को मसाइल के हल में शामिल किया जाए।

6. सिविल सोसायटी और तंज़ीमें (Civil Society & NGOs) अमनसाज़ी प्रोग्राम

NGOs की तरफ़ से ऐसे प्रोग्राम हों जो साम्प्रदायिक तनाव को कम करें। मश्तरका तरक़्क़ी मंसूबे: मुख्तलिफ़ क़ौमों को शामिल करके तरक़्क़ी के मंसूबे चलाए जाएँ। मतास्सिरीन की मदद: साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार लोगों को मदद और इन्साफ़ मुहैया कराया जाए।

7. हुकूमत और सियासी जवाबदेही (Government & Political Accountability)

ग़ैर-जानिबदार रहनुमाई: सियासी रहनुमाओं को तफ़रीक़ पैदा करने वाली ज़बान से परहेज़ करना चाहिए। शामिलाती हुकूमरानी (Inclusive Governance): हर क़ौम की आवाज़ और ज़रूरत को पॉलिसियों में शमूलियत दी जाए। मुनासिब हल के निज़ाम: तैज़ और इनसाफ़पसंद तना'ज़आत के हल के लिए मुनासिब निज़ाम कायम किया जाए।

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पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

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